लखीमपुर खीरी : हाथियों के आतंक से परेशान किसानों का फूटा गुस्सा, बेलरायां वन कार्यालय का किया घेराव

लखीमपुर खीरी : उत्तर निघासन रेंज के बेलरायां क्षेत्र में बीते कई हफ्तों से हाथियों का आतंक किसानों की नींद हराम किए हुए है। आए दिन खेतों में हाथियों के झुंड घुसकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग की उदासीनता से परेशान होकर आखिरकार रविवार को क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने बेलरायां वन कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा और चेतावनी दी कि अगर शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

ग्रामीणों के अनुसार बीते बीस दिनों से भैरमपुर, मांझा, चौगुरजी, तकियापुर, मोतीपुर, कुसाही, भुलनपुर और भेडौरी समेत कई गांवों में हाथियों का झुंड रात-दिन आतंक मचाए हुए है। किसानों की मेहनत से लहलहाती धान और गन्ने की फसलें हाथियों के पैरों तले रौंदी जा रही हैं। इस कारण किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर रहा है और आर्थिक नुकसान भी बढ़ता जा रहा है।

तकियापुरवा निवासी किसान मुसर्रफ, कपिल, गणेश भार्गव और फिदा हुसैन ने बताया कि शनिवार की शाम वे अपने खेतों की रखवाली कर रहे थे, तभी अचानक जंगल से हाथियों का झुंड खेतों की ओर आ गया। हाथियों ने चिघाड़ते हुए किसानों को दौड़ा लिया। जान बचाने के लिए किसानों ने आग और पटाखे जलाए और किसी तरह खेत से भागकर जान बचाई। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति अब आम हो चुकी है और रोजाना इसी तरह हाथियों से जान का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग हाथियों को नियंत्रित करने या उन्हें गांव की ओर आने से रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। जंगल की परिधि पर जो जाली लगाई गई थी, वह गिर चुकी है और विभाग ने उसकी मरम्मत तक कराने की जहमत नहीं उठाई। न तो गश्त हो रही है और न ही हाथियों को भगाने की कोई व्यवस्था की गई है। किसानों ने कहा कि विभाग की लापरवाही से उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं और उनकी जान भी खतरे में है।

ज्ञापन सौंपा, कार्रवाई की मांग

आक्रोशित किसानों ने वन कार्यालय बेलरायां पहुंचकर घेराव किया और अपनी समस्याएं वन दरोगा हरीलाल के सामने रखीं। किसानों ने मांग की कि विभाग जल्द से जल्द जाली की मरम्मत कराए, गांवों में गश्त बढ़ाई जाए और हाथियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। ज्ञापन सौंपते हुए किसानों ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।

इस मौके पर क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से आए सैकड़ों किसान मौजूद रहे। इनमें अंकुर, छंगा लाल, रविंद्र वर्मा, हरिश्चंद्र, माठे, उमाशंकर, वसीक, शफीक खान, लवकुश वर्मा, हामिद सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। सबका कहना था कि अब सब्र का बांध टूट चुका है और अगर समय रहते विभाग नहीं चेता तो किसान मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

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