दिल्ली में भी मंडरा रहा जहरीले पानी का खतरा, भूजन में फैल रहा ‘यूरेनियम जहर’

Delhi Water Contaminated : दिल्ली के भूजल में यूरेनियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई जाने से राजधानी में गंभीर चिंता का माहौल बन गया है।

केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लिए गए 103 भूजल नमूनों में से 13 में यानी लगभग 12.63 प्रतिशत में यूरेनियम का स्तर तय मानकों से ऊपर पाया गया है। यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही है और बिना किसी तत्काल लक्षण के लाखों लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे दिल्ली एक ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’ की ओर बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि यूरेनियम का सेवन न सिर्फ किडनी और हड्डियों को प्रभावित करता है, बल्कि सीधे नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क पर भी गहरा असर डालता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी का सेवन न्यूरोटॉक्सिसिटी का कारण बन सकता है, जिससे याददाश्त कमजोर होने, सीखने की क्षमता घटने, मूड डिसऑर्डर और तनाव जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। यह ‘साइलेंट किलर’ के रूप में पहचाना जाता है क्योंकि इसकी मौजूदगी शरीर में धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में किसी भी तरह के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. हर्षल आर. सावले के अनुसार, यह न्यूरोटॉक्सिसिटी तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाती है, जिससे शरीर में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं जन्म ले सकती हैं।

पेयजल मानकों के अनुसार, पानी में यूरेनियम की अधिकतम सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर (30 पीपीबी) तय की गई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के कुछ इलाकों में यह मात्रा 59 पीपीबी तक पहुंच चुकी है, जबकि 13 नमूनों में यह सीमा से अधिक पाया गया है। यह मुख्य रूप से उत्तरी दिल्ली, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली, साथ ही रोहिणी, बवाना औद्योगिक क्षेत्र और नांगलोई-राजपुरा जैसे इलाकों में सबसे अधिक चिंता का विषय है।

यह समस्या विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा प्रभावित कर रही है, क्योंकि उनके शरीर इस विषाक्तता का अधिक खतरा झेलते हैं। इससे एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, नींद में गड़बड़ी और मानसिक थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। दिल्ली में प्रतिदिन करीब एक हजार करोड़ लीटर पानी की खपत होती है, जिसमें से लगभग 10 से 13 प्रतिशत भूजल से आता है। ऐसे क्षेत्र, जहां भूजल दूषित है, वहां यह ‘अदृश्य जहर’ लोगों के स्वास्थ्य पर लगातार असर डाल रहा है।

एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. अनंत मोहन का कहना है कि यूरेनियम सबसे पहले किडनी को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन इसकी गहरी छवि दिमागी कार्यप्रणाली पर भी पड़ती है। लंबे समय तक इस पानी का सेवन ब्रेन सेल्स की कार्यक्षमता को धीमा कर सकता है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रभावित इलाकों में आरओ आधारित जल फिल्टर का इस्तेमाल किया जाए, बच्चों को विशेष रूप से ऐसे पानी से दूर रखा जाए, भूजल की नियमित निगरानी की जाए और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध कराए जाएं।

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