दिल्ली क्राइम ब्रांच का बड़ा खुलासा: अंतरराज्यीय ऑटो लिफ्टर गिरोह का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार, 16 लग्जरी गाड़ियां बरामद

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने ऑटो लिफ्टर्स के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि यह गिरोह दिल्ली से महंगी और ऑन-डिमांड गाड़ियों की चोरी कर उन्हें पंजाब और हिमाचल प्रदेश ले जाता था। वहां चेसिस नंबर से छेड़छाड़ कर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए दोबारा रजिस्ट्रेशन कराकर इन गाड़ियों को देश के अलग-अलग राज्यों में बेचा जाता था। हैरानी की बात यह है कि कई मामलों में चोरी की गई गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन बदलवाकर दोबारा दिल्ली में ही बेच दिया जाता था।

इस मामले में क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी अमनदीप, पंजाब निवासी दमनदीप और चंडीगढ़ निवासी अरविंद शर्मा के रूप में हुई है।

डीसीपी ने बताया कि गाड़ी चोरी होने के बाद सबसे पहले अमनदीप को सूचना दी जाती थी। इसके बाद वह ड्राइवरों को हायर कर चोरी की गाड़ियों को दिल्ली से पंजाब तक भिजवाता था। अधिकतर ड्राइवरों को यह नहीं बताया जाता था कि वाहन चोरी का है, बल्कि उन्हें लोन डिफॉल्ट की गाड़ी बताकर प्रति ट्रिप करीब 1500 रुपये दिए जाते थे। इस काम के बदले अमनदीप को प्रति वाहन लगभग 50 हजार रुपये मिलते थे।

पुलिस ने अब तक 16 गाड़ियां बरामद की हैं, जिनमें 8 टोयोटा फॉर्च्यूनर, 5 किआ सेल्टोस, 1 हुंडई वेन्यू, 1 महिंद्रा थार और 1 हुंडई क्रेटा शामिल हैं। डीसीपी गौतम ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने कम से कम 100 गाड़ियां चोरी कर बेचने की बात स्वीकार की है।

चोरी की गई गाड़ियों को बाजार मूल्य से करीब 60 से 70 प्रतिशत कीमत पर बेचा जाता था, जबकि दमनदीप को प्रति वाहन लगभग 5 लाख रुपये तक का मुनाफा होता था। चोरी अधिकतर ऑन-डिमांड होती थी, यानी जिस मॉडल, रंग और वेरिएंट की मांग होती थी, उसी के अनुसार गाड़ियों की रेकी कर चोरी की जाती थी।

पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। आने वाले दिनों में और गाड़ियों की बरामदगी के साथ पूरे गिरोह का पूरी तरह खुलासा होने की उम्मीद है।

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