दिल्ली अदालत का बड़ा फैसला : शादी का वादा रेप साबित नहीं कर सकता

नई दिल्ली। दिल्ली की अदालत में दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी को राहत मिल गई है। अदालत ने कहा कि शादी के बाद किसी और के बीच केवल शारीरिक संबंध बन जाने से ही रेप साबित नहीं होता है। इस मामले में एक शादीशुदा महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपनी पत्नी से तलाक लेने का झूठा दावा किया था। इसी आधार पर उसके साथ वह शारीरिक संबंध बनाता रहा। इस मामले की सुनवाई एडिशनल सेशन जज प्रियंका भगत ने की थी, उन्होंने साफ कहा कि जब महिला को पता है कि आरोपी की शादी हो चुकी है। उसके बाद भी वह उसके साथ संबंध में है, तो प्रथम दृष्ट्या ही इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। अदालत ने माना है कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।


इस मामले में शिकायतकर्ता महिला ने तिमारपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। आरोप लगाए थे कि आरोपी ने उससे शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। साथ ही अपनी पत्नी के तलाक देने की बात भी स्वीकार की थी, लेकिन जांच में यह सामने आया कि महिला आरोपी की पत्नी और उसके परिवार के साथ संपर्क में थी। उसे आरोपी की पारिवारिक स्थिति के बारे में पता था। इसके बावजूद दोनों के बीच यौन संबंध बने रहे।


आरोपी मोहित की तरफ से वकील ने अदालत में कहा कि इस मामले में रेप का कोई आरोप बनता ही नहीं है, उन्होंने बताया कि आरोपी और शिकायतकर्ता साल 2017 से आपसी सहमति से रिश्ते में थे। दोनों के बीच सब कुछ सहमति से हुआ था। वकील ने कहा कि अदालत में जो भी सबूत पेश किए गए हैं, उनसे यह साबित नहीं हो पाता है कि महिला ने शादी के वादे पर भरोसा करके आरोपी के साथ संबंध बनाए हों। वकील ने अदालत को बताया कि महिला पहले से शादीशुदा थी, जब आरोपी के साथ उसके संबंध बने थे, तो उस समय भी उसकी शादी चल रही थी। इसलिए आरोपी पर लगाए गए आरोप सही नहीं साबित होते हैं। वकील ने कहा कि आरोपी की शादी 2020 में हुई थी। उस शादी से उसका एक बच्चा भी है, उन्होंने कहा कि जब आरोपी ने दूसरी लड़की से शादी की थी। तब महिला ने कोई आपत्ति क्यों नहीं दिखाई। वकील ने बताया कि महिला ने पहले भी 9 सितंबर 2023 को एक एफआईआर दर्ज करवाई थी, लेकिन उसमें रेप जैसा कोई भी आरोप नहीं था। इसके अलावा अदालत को बताया गया कि एफआईआर के बाद भी महिला अगस्त 2024 तक आरोपी के साथ संबंध में थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए एडिशनल सेशन जज प्रियंका भगत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से साफ मना कर दिया। साथ ही अपना फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि महिला ने सिर्फ शादी के वादे या आरोपी के यह कहने पर उसने तलाक ले लिया है। साथ ही शारीरिक संबंध बनाए हों। अदालत ने इसी पहलू को ध्यान में रखा कि जब महिला आरोपी की पारिवारिक स्थिति को बहुत अच्छे से जानती थी, उसके बाद भी केवल शादी के वादे के आधार पर रेप के आरोप को सही नहीं माना जा सकता है। साथ ही सहमति से बने संबंधों को जबरन आरोप की श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को इस मामले से बरी कर दिया है।

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