
शिमला। जनवरी की सर्द रात के बीच राजधानी शिमला के उपनगर ढली से सटे चलौंठी इलाके में लोग अपने घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो गए। शुक्रवार देर रात एक छह मंजिला रिहायशी मकान की दीवारों में अचानक गहरी दरारें उभर आईं। हालात इतने गंभीर थे कि प्रशासन और पुलिस ने एहतियातन मकान को तुरंत खाली करवा दिया। इस भवन में रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं समेत 15 परिवार कड़ाके की ठंड में आधी रात को सड़क पर आ गए।
परवाणू से शिमला के लिए बन रहे फोरलेन प्रोजेक्ट के अंतिम चरण में शिमला से केथलीघाट तक फोरलेन का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके तहत शिमला के उपनगर ढली तक सड़क चौड़ी की जा रही है और भट्ठाकुफर से चलौंठी तक लंबी टनल बनाई जा रही है। जिस मकान में दरारें आईं और जिसे खाली कराया गया, वह इसी टनल के ऊपर स्थित है।
स्थानीय लोगों के अनुसार चलौंठी बाईपास पर स्थित यह छह मंजिला मकान अनंतराम का है। इसमें मकान मालिक सहित कुल 15 परिवार रहते थे। मकान के साथ-साथ ढली–संजौली बाईपास सड़क पर भी दरारें दिखाई दीं। इसके बाद देर रात ही इस सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया। सुरक्षा के लिहाज से मौके पर पुलिस तैनात कर दी गई।
मकान में रहने वाले किरायेदारों का कहना है कि तीन दिन पहले दीवारों पर हल्की दरारें दिखनी शुरू हो गई थीं। लोगों ने इस खतरे को लेकर फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी और जिला प्रशासन को शिकायत दी थी। कंपनी के कर्मचारी मौके पर आए और दरारें देखने के बाद यह कहते हुए लौट गए कि फिलहाल भवन को कोई बड़ा खतरा नहीं है। लेकिन शुक्रवार को अचानक दरारें तेजी से बढ़ने लगीं, जिससे लोगों में अफरातफरी मच गई।
देर रात मकान खाली करने को कहा गया, लेकिन लोगों के ठहरने का कोई इंतजाम नहीं किया गया। रात 11:30 बजे तक परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ सड़क पर बैठे नजर आए। सूचना मिलते ही एडीएम पंकज शर्मा रात करीब 11 बजे मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
खतरे की जद में सिर्फ रिहायशी मकान ही नहीं आया। पास ही स्थित एक होटल को भी खाली कराया गया। देर रात होटल में ठहरे पर्यटकों को बाहर निकाला गया, जिससे वे भी शिमला की कड़ाके की ठंड में परेशान होते रहे।
स्थानीय लोगों का गुस्सा प्रशासन और पुलिस पर भी फूट पड़ा। उनका कहना है कि खतरे की जानकारी पहले ही दे दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि टनल निर्माण के दौरान हो रही लगातार कंपन से मकानों की नींव कमजोर हो रही है। चलौंठी और आसपास का इलाका घनी आबादी वाला है, जहां कई बहुमंजिला मकान बने हैं। लोगों को डर है कि यदि काम इसी तरह चलता रहा तो और भी मकान खतरे में आ सकते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ढली–भट्ठाकुफर इलाके में फोरलेन टनल को लेकर सवाल उठे हों। पिछले साल 30 जून को भट्ठाकुफर में एक पांच मंजिला मकान ढह गया था। उस समय भी आरोप लगे थे कि फोरलेन निर्माण के लिए की गई गलत कटिंग इसकी वजह बनी। इसके अलावा 22 नवंबर को भट्ठाकुफर बाजार की सड़क भी धंस गई थी जो टनल के ठीक ऊपर बनी है।















