
कानपुर। सरकार के नौकरशाहो के बारे में तो आप लोगो ने सुना होगा लेकिन नौकरशाहो के भी शाही नौकर होते है यह आपको आरटीओ विभाग में देखने को आसानी से मिल जायेगा। आरटीओ विभाग हमेशा से दलालों और भ्रष्टाचार में लिप्त रहने की सुर्खियों में बना चला आ रहा है। इस पर लगाम लगाने की किसी ने कोई भी कवायत नही की ,बल्कि जो भी अधिकारी आया वह भी इसी का हिस्सा बना। और बने भी क्यों न जब बैठे-बैठे उनको अच्छी खासी कमाई मिल रही है तो वह हिस्सा क्यों नही बनेंगे। आरटीओ विभाग में 40 से ज्यादा निजी लोग इस सरकारी विभाग में काम कर रहे है जो न तो आउट सोर्सिंग से है और न ही किसी कंपनी के द्वारा विभाग में लिए गए है। इन सब का वास्तविक संरक्षक कौन कर रहा है ? एआरटीओ प्रशासन को क्या इसकी जानकारी नही है या फिर जानकार होकर भी अंजान बने हुए है। उनकी नाक के नीचे विभाग में सब हो रहा है और उन्हें सब जानकारी है। फिर भी ईमानदारी का डंका और पारदर्शिता की बेमानी बाते कर जनता से छलावा किया जा रहा है। यही नही सरकार और जिला प्रशासन की आंखों में इस कदर धूल झोंकी जा रही ह जैसे तालाब में पानी स्थिर होने के बाद बिल्कुल स्वच्छ दिखाई पडता है। वही अगर कोई भी सामान्य व्यक्ति आरटीओ विभाग में अपना काम करवाने जाता है तो उस पर नियम की इतनी पोटली बांध देते है कि उसे इस विभाग में काम करवाना उसके लिए किसी शेर की जबड़े से खाना छीनने के बराबर हो जाता है। अब ऐसे में ईमानदारी का डंका और शासन में अपनी पैठ बताने वाले अधिकारियों पर कौन नकेल कसेगा ? ऐसे कई सवाल है जिन पर विभाग कई वर्षो से चुप्पी साधे हुए है कि कही पूरी पोल न खुल जाए।