
जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मनरेगा के कायाकल्प और नई योजना विकसित भारत जी राम जी को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर करारा प्रहार किया है। शेखावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक मनरेगा को भ्रष्टाचार की दुधारू गाय बनाकर लूटा है, लेकिन अब मोदी सरकार की पारदर्शिता से इन भ्रष्टाचारियों के पेट में दर्द हो रहा है।
रविवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए कहा कि आज जो लोग इस योजना के पैरोकार बन रहे हैं, उनके अपने दिग्गजों ने ही इसकी विफलता की पुष्टि की थी। जब शरद पवार 10 साल तक देश के कृषि मंत्री थे, तब उन्होंने संसद और सार्वजनिक मंचों पर बार-बार चिंता जताई थी कि मनरेगा कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। उन्होंने इसे दुरुस्त करने और इसमें संशोधन की मांग की थी। शेखावत ने कहा कि कांग्रेस के ही नेता जयराम रमेश ने खुद लोकसभा के पटल पर स्वीकार किया था कि मनरेगा केवल खड्डे खोदने और उन्हें भरने तक सीमित रह गई है, इससे कोई ‘एसेट क्रिएशन’ नहीं हो पा रहा।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आड़े हाथों लेते हुए शेखावत ने कहा कि जब 14वें वित्त आयोग ने राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत (प्रभावी रूप से 47 प्रतिशत) किया, तब जोधपुर के हमारे अपने मुखिया भी उस मांग के स्टेकहोल्डर थे। राज्यों को अतिरिक्त 15 प्रतिशत पैसा इसी शर्त पर दिया गया था कि वे इसका उपयोग ग्रामीण विकास में करेंगे, लेकिन गहलोत सरकार ने उस धन को विकास के बजाय तुष्टीकरण और मुफ्त की रेवडय़िों में उड़ा दिया। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी पर तंज कसते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत कहा कि दोनों ने कई बार मनरेगा के भ्रष्टाचार पर प्रश्न खड़े कर चुके हैं। खुद उन्होंने माना था कि राज्यों में यह योजना लूट का जरिया है, लेकिन आज जब हम जी-राम-जी के जरिए टेक्नोलॉजी और पारदर्शिता ला रहे हैं तो उन्हें इसमें दोष दिख रहा है।
भ्रष्टाचार का बंगाल मॉडल और मशीनों का खेल :
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने चौंकाने वाले तथ्य रखते हुए कहा कि मनरेगा में मजदूरों की जगह मशीनों से काम कराया गया और 80 साल के बुजुर्गों के फर्जी नाम लिखकर पैसे डकारे गए। पश्चिम बंगाल के 19 जिलों में ऑडिट हुआ और सभी में अनियमितताएं पाई गई। विपक्षी राज्यों ने इसे अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को वित्त-पोषित करने का जरिया बना लिया था। 11 लाख से ज्यादा शिकायतें भारत सरकार के पास लंबित थीं, जिन्हें अब जी-राम-जी मिशन के तहत एड्रेस किया जा रहा है।
गारंटी डाइल्यूट नहीं, मजबूत हुई :
शेखावत ने विरोधियों को आंकड़ों से जवाब देते हुए कहा कि यूपीए के 10 साल में मात्र 1 लाख करोड़ खर्च हुए थे, जबकि मोदी सरकार ने 11 साल में 4 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया है। नई योजना में रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो सरकार को पेनल्टी के साथ भुगतान करना होगा। यदि सरकार रोजगार देने में विफल रही तो मजदूर को अनिवार्य रूप से मुआवजा मिलेगा। जल संरक्षण (अमृत सरोवर), रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका संवर्धन और प्राकृतिक आपदा मिटिगेशन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
राम के नाम पर विरोध क्यों? :
शेखावत ने पूछा कि जिन्होंने प्रभु राम के अस्तित्व को नकारा, उन्हें आज ‘जी राम जी’ नाम से भी आपत्ति है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि गांवों को विकसित बनाने की साधना है। जो लोग विकास के इस अलाइनमेंट का विरोध कर रहे हैं, जनता उन्हें जल्द ही सही दवा देगी। जी राम जी से राजनीतिक बिचौलियों का खेल खत्म होना तय है।















