नवी मुंबई में 5,000 करोड़ रुपये के जमीन घोटाला की जांच के लिए समिति गठित

Mumbai : महाराष्ट्र राज्य सरकार ने नवी मुंबई में करीब 5,000 करोड़ रुपये ज़मीन घोटाला की जांच के लिए शनिवार को कोंकण डिविजनल कमिश्नर के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की है। इस समिति में ठाणे के चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, रायगढ़ के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, सिडको-तीन के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और अलीबाग के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स मेंबर हैं। सिडको (ठाणे/रायगढ़) के चीफ लैंड एंड सर्वे ऑफिसर बतौर सदस्य नियुक्त किए गए हैं।

मंत्रालय के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि यह जांच समिति दापोली, कोपर, तारघर, सोनखर और उल्वे में जमीन के मालिकाना हक के निर्धारण की जांच करेगी। जांच समिति को नवी मुंबई में इस जमीन से जुड़े फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के हितों के बारे में भी जांच करने और सिफारिशें करने के लिए कहा गया है। जांच समिति को अपनी रिपोर्ट देने के लिए दो महीने का समय दिया गया है।

महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना शिंदे समूह के नेता संजय शिरसाट पर नवी मुंबई में मौके की करीब 5,000 करोड़ रुपये की ज़मीन मामूली कीमत पर बिवलकर परिवार को देने का आरोप राकांपा एसपी विधायक रोहित पवार ने लगाया था। रोहित पवार ने दावा किया है कि वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के मंत्री जब राज्य में एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब संजय शिरसाट को सिडको का अध्यक्ष पद सौपा था। उसी समय सिडको के अध्यक्ष पद का दुरुपयोग करते हुए नवी मुंबई की वेशकीमती जमीन कौडिय़ों के भाव में विवलकर परिवार को बेच दिया था। इस शिकायत के बाद आज राज्य सरकार इस कथित जमीन घोटाले की जांच के समिति की गठन कर दिया है।

हालांकि विधायक रोहित पवार ने कहा कि सरकार ने भले ही इस जमीन घोटाले की जांच के लिए समिति गठित की है। लेकिन सिर्फ कमेटी बनाना काफी नहीं है, बल्कि एक रिटायर्ड जज की देखरेख में एक स्वतंत्र जांच करना जरूरी है। इसके अलावा, इस मामले की गंभीरता और कमेटी की जांच को प्रभावित करने की संभावना को देखते हुए, मंत्री संजय शिरसाट का इस्तीफा मांगा जाना चाहिए।

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