
Seema Pal
Chaitra Navratri 2025 : गुरुवार को चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है, जिसमें माता कात्यायनी की आराधना की जाती है। इस दिन माता कात्यायनी की पूजा करने से शत्रुओं का विनाश और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। क्या आपने कभी सोचा है कि नौ देवियों के अलग-अलग स्वरूपों का जन्म कैसे हुआ और कैसे नौ माताओं के नाम पड़े?
माता कात्यायनी के भौतिक स्वरूप की बात करें तो उनका रूप सुनहरा और चार भुजाओं वाला है। उनके दाएं हाथों में अभय मुद्रा और वर मुद्रा के साथ तलवार और कमल का फूल है। भक्तों के लिए उनकी आराधना करने से सभी दुख दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा?
माता कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथन के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए हजारों साल तक कठिन तपस्या की थी। तब माता दुर्गा ने उनकी तपस्या से प्रसन्न हो कर उन्हें दर्शन दिए थे। महर्षि कात्यायन माता से इच्छी की थी कि मां भगवती उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। माता ने उनकी इच्छा को पूरी करने के लिए महर्षि की पत्नी के गर्भ से पुत्री के रूप में जन्म लिया और माता का नाम कात्यायनी नाम पड़ा।