
Delhi Turkman Gate : दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बीच, पत्थरबाजी की घटना को लेकर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कराई है और घटना में शामिल होने के शक में करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
सीसीटीवी फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग की मदद से पत्थर फेंकने वालों की पहचान की जा रही है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बुधवार सुबह यह जानकारी दी।
मामले के संबंध में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यहां देर रात म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (एमसीडी) ने अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इन धाराओं में शामिल हैं-
- धारा 221 – लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकना
- धारा 132 – लोक सेवक पर हमला या बल प्रयोग
- धारा 121 – लोक सेवक को गंभीर नुकसान पहुँचाने की मंशा
- धारा 191(2) व 191(3) – झूठी जानकारी देना और झूठा साक्ष्य
- धारा 223(A) – गैरकानूनी जमावड़ा
- धारा 3(5) बीएनएस – सामूहिक अपराध की जवाबदेही
इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
धाराओं का विवरण
- धारा 221: यदि कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को उसके वैध कर्तव्य से बल, धमकी या अवैध साधनों से रोकता है, तो यह अपराध है। इसमें 5 वर्ष तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
- धारा 132: ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी पर हमला या बल प्रयोग करने पर 2 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों।
- धारा 121: सरकारी कर्मचारी को गंभीर नुकसान पहुंचाने की मंशा से हमला करने पर तीन महीने जेल, 2500 रुपये का जुर्माना या दोनों।
- धारा 191(2) व 191(3): जानबूझकर झूठी जानकारी देने या झूठा साक्ष्य प्रस्तुत करने के मामलों में 2 से 5 साल तक की जेल या जुर्माना।
- धारा 223(A): गैरकानूनी जमावड़ा कर कानून व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ, तीन महीने जेल या 2500 रुपये का जुर्माना या दोनों।
- धारा 3(5) बीएनएस: समूह या भीड़ द्वारा अपराध अंजाम देने पर, हर आरोपी को जिम्मेदार माना जाएगा, जिसकी सजा धारा 191 जैसी ही होगी।
सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 (धारा 3):
यदि कोई व्यक्ति सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे भी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस अधिनियम के तहत अलग-अलग स्तर पर 6 महीने से लेकर 10 साल तक की जेल हो सकती है।
दिल्ली पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और पत्थरबाजी में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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