
नई दिल्ली। तंबाकू पर 28 से 40 प्रतिशत जीएसटी दर करने से टैक्स में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि और नए एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर ने अवैध सिगरेट का कारोबार बढ़ने का डर पैदा कर दिया है। कई ब्रोकरेज हाउस ने टैक्स दरों में बढ़ोतरी के बाद भारत में अवैध सिगरेट के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने दरों में बढ़ोतरी को ‘दो कदम पीछे’ जाने जैसा बताया है। संस्थान का कहना है कि सिगरेट पर टैक्स में यह अप्रत्याशित बढ़ोतरी पिछले आठ साल से अवैध कारोबार से निपटने में वैध उद्योग की मदद करने और स्थायित्व बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही टैक्स रणनीति के विपरीत है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैक्स में इस बढ़ोतरी से अवैध कारोबार में वृद्धि हो सकती है। 35 प्रतिशत से ज्यादा की अप्रत्याशित बढ़ोतरी से कीमतों पर असर पड़ेगा, जिससे अवैध व्यापार एवं उत्पादों की ओर लोगों का रुझान बढ़ेगा। इससे लंबी अवधि में वैध उद्योग की विकास की संभावनाओं पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।
उपभोक्ताओं का रुझान बदलने की स्थिति एकदम सीधी है: कीमतों में बहुत ज्यादा अंतर से खर्च के प्रति ग्राहकों का विचार बदलता है। खर्च का ध्यान रखने वाले उपभोक्ताओं के मामले में कीमतों में बड़ा अंतर अवैध उत्पादों को ज्यादा आकर्षक विकल्प बना देता है।
जेफरीज ने बढ़ती चिंताओं के बीच टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (टीआईआई) का हवाला देते हुए कहा, ‘कीमतों में अंतर से टैक्स नहीं चुकाने वाले सिगरेट को फायदा पहुंच सकता है, जिससे सरकार को टैक्स का नुकसान होगा। तंबाकू उपभोग में वैध सिगरेट की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत है, जबकि कुल टैक्स में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। ऐसे में अवैध सिगरेट को बढ़ावा मिलने से टैक्स का बड़ा नुकसान होगा।’
नोमुरा ने भी इसी तरह की राय देते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘सिगरेट पर ज्यादा टैक्स का लक्ष्य इसका उपभोग कम करना होता है, लेकिन इससे अवैध सिगरेट को बढ़ावा मिलता है और उपभोक्ता ज्यादा सस्ते और टैक्स नहीं चुकाने वाले तस्करी कर लाए हुए सिगरेट की ओर रुख करते हैं। वित्त वर्ष 2012-13 से 2017-18 के दौरान टैक्स दरों में बढ़ोतरी के बावजूद राजस्व लगभग समान ही रहा, क्योंकि वैध सिगरेट की बिक्री कम हुई और अवैध सिगरेट की बिक्री बढ़ गई। वित्त वर्ष 2017-18 के बाद से टैक्स में स्थिरता देखने को मिली, जिससे अवैध कारोबार के बढ़ने की गति थोड़ा धीमी पड़ी। हमारा मानना है कि टैक्स में इस तरह अचानक बढ़ोतरी से फिर अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।’
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया जैसे देश से मिला अनुभव दिखाता है कि कैसे तंबाकू उत्पादों पर बहुत ज्यादा टैक्स से संगठित अपराध को बढ़ावा मिल सकता है। वहां 2012 से 2020 के दौरान लगातार टैक्स में बढ़ोतरी से सिगरेट की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिससे अवैध तंबाकू उत्पादों की हिस्सेदारी बाजार में 2 से 14 प्रतिशत पर पहुंच गई। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि अवैध तंबाकू उत्पादों का बाजार बहुत ज्यादा बढ़ा है और संगठित अपराधियों ने इस पर कब्जा जमा लिया है। ऑस्ट्रेलिया के सांसदों ने सार्वजनिक रूप से तंबाकू उत्पादों पर टैक्स कम करने की अपील की है, क्योंकि प्रवर्तन के प्रयास विफल हो रहे हैं।
भारत में पहले से ही कुल तंबाकू बाजार में अवैध तंबाकू उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 26 प्रतिशत है, जो इसे वैश्विक स्तर पर तस्करी कर लाए हुए तंबाकू उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा बाजार बनाता है। वैश्विक आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं। दुनियाभर में सिगरेट की किफायत पर नजर रखने वाली डब्ल्यूएचओ ग्लोबल हेल्थ ऑब्जर्वेटरी (2024) के अनुसार सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड्स के मामले में प्रति व्यक्ति जीडीपी के प्रतिशत के हिसाब से भारत में सिगरेट सबसे ज्यादा महंगी है।
यह जापान, अमेरिका, जर्मनी, चीन, यूके, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों की तुलना में बहुत ज्यादा है। 17 वर्षों (2005-2022) में 71 देशों को कवर करते हुए की गई 2024 की अपनी ग्लोबल स्टडी में अल्वारेज एंड मार्सल ने पाया कि जब किसी बाजार में अवैध कारोबार अपने पैर जमा लेता है, तो उसे कम करना बहुत मुश्किल होता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ‘सरकार अवैध व्यापार को नियंत्रित करने के लिए टैक्स एवं कीमत के प्रभाव को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ प्रवर्तन पर निर्भर नहीं रह सकती है।’ इसका अर्थ है कि तंबाकू उत्पादों पर बहुत ज्यादा टैक्स से अपराधियों द्वारा चलाया जाने वाला अवैध कारोबार का नेटवर्क फैलने का खतरा रहता है, जिससे ऐसी समस्या पैदा होती है, जिसका समाधान मुश्किल हो जाता है।
नाम नहीं बताने की शर्त पर एक ब्रोकरेज फर्म के विशेषज्ञ ने कहा, ‘नई एक्साइज ड्यूटी अप्रत्याशित है। नई दर 1 फरवरी, 2026 से लागू होने वाली है, इसलिए अभी समय है कि इस पर पुनर्विचार किया जाए और अनियंत्रित अवैध कारोबार के नेटवर्क की बड़ी समस्या के पैर पसारने से पहले ही समाधान कर लिया जाए। संसद में दिलाए गए भरोसे से यह उम्मीद बंधी थी कि कुल टैक्स को रेवेन्यू न्यूट्रल रखा जाएगा।’
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में भी इस पर चिंता जताते हुए कहा गया है, ‘केएसएफटी (किंग साइज फिल्टर) सेगमेंट पर ज्यादा टैक्स से इस बात का खतरा है कि उपभोक्ता सस्ते विकल्पों की ओर रुख करेंगे। इससे अवैध सिगरेट की बिक्री बढ़ सकती है।’
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भी सिगरेट तस्करी बढ़ने की चेतावनी देते हुए कहा, ‘दोहरे अंकों में टैक्स दरों में बढ़ोतरी से ग्राहक तस्करी कर लाई हुए सिगरेट की ओर रुख कर सकते हैं।















