
BMC Elections 2026 : मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में ठाकरे भाइयों ने ग्राउंड कैंपेन की रणनीति तैयार कर ली है। शाखा दौरों, जॉइंट मीटिंग और मराठी वोटर्स पर केंद्रित इस अभियान में ‘ब्रांड ठाकरे’ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
सीधी मैदान में उतर रहे हैं ठाकरे भाई
इस बार मुंबई नगर निगम चुनाव में शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के नेता सीधे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर रहे हैं। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का पूरा फोकस शाखा दौरों और जमीनी कैंपेन पर रहेगा। योजना के मुताबिक, राज ठाकरे हर दिन उन वार्डों में शाखा विजिट करेंगे, जहां एमएनएस की संगठनात्मक ताकत मजबूत मानी जाती है। मकसद स्थानीय कार्यकर्ताओं, ऑफिस बियरर्स और उम्मीदवारों को सशक्त बनाना है।
यह पहली बार है कि शिवसेना (UBT) और एमएनएस की कुछ शाखाओं में दोनों नेता एक साथ शाखाओं का दौरा करेंगे। वे कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश देंगे और सीधे मुंबईकरों से संवाद स्थापित करेंगे। आने वाले दिनों में दोनों भाई शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर लोगों से मुलाकात करेंगे और उनके मुद्दों को सुनेंगे।
कैंपेन के अंतिम दौर में ठाकरे भाइयों की संयुक्त जॉइंट मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। रणनीति यह है कि पहले जमीनी नेटवर्क को सक्रिय किया जाए और फिर एक साझा मंच से अपनी ताकत का प्रदर्शन किया जाए। इसी क्रम में 6 तारीख को जॉइंट इंटरव्यू के जरिए प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाने का प्लान है।
कैंपेन में युवा नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। आदित्य ठाकरे ने अमित ठाकरे को खास जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों की संयुक्त बैठकों का आयोजन मुंबई के विभिन्न हिस्सों में किया जाएगा, ताकि युवाओं और पहली बार वोट देने वालों तक पहुंच बनाई जा सके।
कोंकण बेल्ट पर फोकस बढ़ाते हुए, मुंबई में रहने वाले कोंकण मूल के मतदाताओं से जुड़ने की जिम्मेदारी भास्कर जाधव और विनायक राउत को दी गई है। ये नेता मीटिंग और कॉर्नर मीटिंग के जरिए मराठी माणूस और उसकी अस्मिता के मुद्दे को धार देंगे।
यह चुनाव सीधे-सीधे ‘ब्रांड ठाकरे’ की प्रतिष्ठा का सवाल माना जा रहा है। चुनाव आयोग की सूची के अनुसार, मुंबई में 87 सीटें ऐसी हैं जहां शिवसेना (UBT) और शिंदे सेना के बीच सीधी टक्कर है। इनमें 69 सीटें शिवसेना (UBT) बनाम शिंदे सेना की हैं और 18 सीटें एमएनएस बनाम शिंदे सेना की। इसके अलावा 97 सीटों पर शिवसेना (UBT) और बीजेपी आमने-सामने हैं।
पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मुंबई में शिंदे सेना का प्रदर्शन शिवसेना (UBT) से बेहतर रहा था। अब जब ठाकरे भाइयों का गठबंधन बनकर मैदान में हैं, तो विपक्ष की ताकत भी बढ़ गई है। शिंदे सेना और बीजेपी ने हिंदुत्व के मुद्दे पर आक्रामक प्रचार शुरू कर दिया है। जवाब में ठाकरे खेमा मराठी माणूस, स्थानीय मुद्दों और नगर निकाय की बुनियादी समस्याओं को केंद्र में लाकर अपने वोटरों को लामबंद करने की कोशिश कर रहा है।
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