
वक्फ (संशोधन) विधेयक भले ही लोकसभा में पास हो चुका है और अब राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया है। लेकिन विपक्ष अभी भी वक्फ संशोधन विधेयक को स्वीकार नहीं कर रहा है।कांग्रेस सांसद सैयद नासीर हुसैन ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि 1995 में जब पिछले वक्फ बिल का समर्थन किया गया था, तब क्या यह किसी एक समुदाय के तुष्टिकरण के लिए था? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बीजेपी को यह “ड्रेकोनियन लॉ” अब समझ आया है, तो 2014 से 2024 तक क्यों नहीं?
हुसैन ने कहा, “आप अपने शासित राज्यों में वक्फ बोर्ड संचालित नहीं करते हैं। आप हमेशा गुमराह करने का काम कर रहे हैं।” उन्होंने यह आरोप लगाया कि बीजेपी अपने नारे के साथ जनता को भ्रमित कर रही है, जबकि वास्तविकता में उनकी नीतियों ने वक्फ के मामलों को निपटाने में कोई प्रगति नहीं कर पाई है।
इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल की विवादास्पद टिप्पणी ने माहौल को गर्मा दिया।
अग्रवाल ने वक्फ बोर्ड की तुलना पुरानी फिल्में के गुंडों से करते हुए कहा, “जैसे फिल्मों में गुंडे जिस औरत पर हाथ रखते थे, वह उनकी हो जाती थी, उसी तरह से ये जिस जमीन पर हाथ रख देते हैं, वह जमीन इनकी हो जाती है।” उनके इस बयान पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है।