
Kiratpur, Bijnor : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की शैक्षिक अर्हता की व्यापक जांच शुरू किए जाने के बाद पूरे प्रदेश में हलचल है। इसका प्रभाव किरतपुर के गली-मोहल्लों में चल रहे उन निजी विद्यालयों पर पड़ा है, जहां न तो एनसीटीई के मानकों के अनुसार योग्य शिक्षक नियुक्त हैं और न ही बच्चों के लिए अनुकूल शैक्षिक वातावरण उपलब्ध है। सरकार की सख्ती के बाद इन स्कूलों में गहमागहमी तेज हो गई है।
यह कार्रवाई झांसी निवासी राहुल जैन की उस शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कई निजी स्कूल बिना डीएलएड, बीएड, सीटीईटी या टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों से पढ़ाई करवा रहे हैं। एनसीटीई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग को तत्काल जांच के निर्देश दिए।
लंबे समय से कई निजी विद्यालय कम वेतन पर अयोग्य शिक्षकों की भर्ती कर शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता कर रहे थे। वहीं किरतपुर के कई छोटे निजी स्कूल भी पठन सामग्री खरीदने के अनावश्यक दबाव, ऊंची फीस और मानकों के विपरीत नियुक्तियों को लेकर पहले से ही सवालों के घेरे में थे।
अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा और प्रशिक्षित शिक्षकों को रोजगार के उचित अवसर मिलेंगे। सभी जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद शिक्षा विभाग राज्य स्तरीय समीक्षा रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।










