
Bihar Politics : बिहार में मोर्चा के चार विधायक में से तीन अब अलग गुट की तरह व्यवहार कर रहे थे, लेकिन हाल के दिनों में दो विधायक माधव आनंद और आलोक कुमार सिंह ने मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात कर एकजुटता का संदेश दिया है।
आलोक सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए नेतृत्व से कोई असहमत नहीं है। वहीं, विधायक रामेश्वर महतो अभी भी अलग चल रहे हैं। यदि वे वापस आ जाते हैं, तो विधायक दल में कोई टूट नहीं रहेगी।
नीतीश कुमार के परिवारवादी राजनीति पर दुविधा
वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत की सक्रिय राजनीति में एंट्री और पूर्व जदयू अध्यक्ष आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की चर्चा तेज हो गई है। इन दोनों मुद्दों पर अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी अब नीतीश कुमार पर है।
सभी नेताओं ने निशांत के मामले में नीतीश से आग्रह किया है। सामाजिक समारोहों में भी निशांत का समर्थन दिख रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री अभी इस पर निर्णय लेने से हिचकिचा रहे हैं। उनके विचार परिवारवाद के खिलाफ हैं, जबकि उनके कई विधायक और सांसद इसी राजनीति पर टिके हैं।
आरसीपी सिंह की वापसी का मामला
पार्टी में पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह की वापसी का मामला अब चर्चा से आगे बढ़कर जमीन पर आ गया है। पटेल छात्रावास में आयोजित दही-चूड़ा भोज के दौरान ही इस बात की शुरुआत हुई थी। हालांकि, वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने इस चर्चा को खारिज कर दिया है।
अतीत में भी, जदयू में किसी नेता की वापसी का निर्णय अंतिम रूप से नीतीश कुमार ही लेते आए हैं। पूर्व सांसद अरुण कुमार, जिनकी पुत्र ऋृतुराज वर्तमान में जदयू के विधायक हैं, की भी वापसी का विरोध हुआ था। इसी तरह, रालोसपा का विलय कर फिर अलग हो चुके उपेंद्र कुशवाहा का भी उदाहरण सामने है।
दोनों करीबी और निर्णायक भूमिका
कभी ललन सिंह और आरसीपी दोनों ही नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे हैं। दोनों की राय को नीतीश सर्वोच्च प्राथमिकता देते थे। आज भी, ललन सिंह का विरोध या समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, 2010 के विधानसभा चुनाव में जब जदयू ने ऐतिहासिक 115 सीटें जीती थीं, उस वक्त ललन सिंह अलग राह पर थे। वहीं, 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी दोनों नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। 2015 में जदयू की सीटें घटकर 71 रह गई थीं, जबकि 2014 लोकसभा चुनाव में पार्टी को केवल दो सीटें मिली थीं। इन चुनावों में दोनों नेताओं की सक्रिय भूमिका थी।
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