
Chhattisgarh Liquor Scam : छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों मामलों में, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध विंग (ACB/ईओडब्ल्यू) ने आरोप लगाए थे, चैतन्य बघेल को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उसकी भूमिका इन मामलों में अन्य वरिष्ठ आरोपियों की तुलना में कम थी और प्रत्यक्ष संलिप्तता के विशिष्ट सबूत नहीं पाए गए हैं।
हाई कोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की एकल पीठ, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि जांच दस्तावेजी प्रकृति का था और चैतन्य बघेल काफी समय से हिरासत में था। कोर्ट ने यह भी माना कि कथित सरगना अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए आवेदक को भी जमानत नहीं देना कानून के समानता के सिद्धांत का उल्लंघन होगा।
अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता के बावजूद, यह स्थायी कारावास का कारण नहीं बन सकती, खासकर जब जांच अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। कोर्ट ने यह भी माना कि जांच में उपलब्ध सबूत, जैसे वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल रिकॉर्ड और बयान, अंतिम निर्णय लेने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जमानत देते हुए, अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी राजनीतिक प्रभाव रखता है, लेकिन गवाहों को डराने या न्याय में बाधा डालने के कोई विशिष्ट सबूत नहीं हैं।
एक अलग आदेश में, हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस महानिदेशक को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए कि लक्ष्मी नारायण बंसल जैसे आरोपी को, जो विशेष न्यायालय के वारण्ट के बावजूद गिरफ्तारी से बच रहा था, केवल बयान लेकर छोड़ दिया गया। इस लापरवाही को ‘गंभीर कानून का उल्लंघन’ करार दिया। अदालत ने पुलिस अधिकारियों को इस तरह की घटनाओं को रोकने के निर्देश भी दिए हैं।
जमानत के साथ ही कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई हैं, जिनमें पासपोर्ट जमा करना, नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहना और मामले के शीघ्र निपटारे में सहयोग करना शामिल हैं। यदि आरोपी इन शर्तों का उल्लंघन करता है या सहयोग नहीं करता है, तो जमानत रद्द की जा सकती है।
भूपेश बघेल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘सत्य की जीत’ कहा। उन्होंने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। यह निर्णय बहुत खुशी की बात है कि चैतन्य को जमानत मिल गई है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और ईओडब्ल्यू जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। बघेल ने कहा, “हमारे पूर्वज आजादी की लड़ाई के दौरान जेल गए थे, तो फिर हम क्यों डरें?”
ईडी ने जुलाई 2023 में कथित शराब घोटाले की धनशोधन जांच के सिलसिले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। इससे पहले, सितंबर 2022 में भी उन्हें गिरफ्तार किया गया था। जांच के अनुसार, यह घोटाला 2019 और 2022 के बीच हुआ, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार थी। केंद्रीय एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा और शराब सिंडिकेट को लाभ हुआ। ईडी का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस घोटाले के मुख्य मुखिया थे और उन्होंने करीब एक हजार करोड़ रुपये की कमाई को अपने नियंत्रण में रखा था। राज्य की एसीबी और ईओडब्ल्यू ने भी दावा किया है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिला है कि इस अपराध की कुल कमाई 3500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
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