
भोपाल : फिल्म धुरंधर में दिखाया गया कुख्यात गैंगस्टर रहमान डकैत का किरदार भले ही पाकिस्तानी डॉन रहमान बलोच से प्रेरित हो, लेकिन भोपाल की जमीन पर ऐसा ही एक खतरनाक अपराधी वर्षों तक बेखौफ राज करता रहा—राजू ईरानी। देश के सात नहीं बल्कि 14 राज्यों में फैले संगठित अपराध नेटवर्क का सरगना राजू ईरानी भोपाल में बैठकर लूट, ठगी और फर्जी अफसर बनकर की जाने वाली वारदातों की पूरी प्लानिंग करता था। भोपाल पुलिस ने उसे आखिरकार सूरत से गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल वह 17 जनवरी तक पुलिस रिमांड में है।
ईरानी डेरा: अपराध का गढ़
भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र की अमन कॉलोनी में स्थित ‘ईरानी डेरा’ लंबे समय से अपराध का अड्डा माना जाता रहा है। यहां करीब 70 मकान हैं, जिनमें से 50 से अधिक परिवारों के सदस्य किसी न किसी आपराधिक गतिविधि से जुड़े बताए जाते हैं। यह डेरा वर्षों तक पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहा। 27-28 दिसंबर की रात पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बाद राजू ईरानी महिलाओं को ढाल बनाकर फरार हो गया था।
कौन है राजू ईरानी
गिरफ्तार आरोपी का असली नाम आबिद अली पिता हसमत अली है, लेकिन वह अपराध की दुनिया में राजू ईरानी के नाम से कुख्यात है। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल समेत 14 राज्यों में 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में लूट, ठगी, फर्जी पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर अपराध करना, धोखाधड़ी और पुलिस पर हमले जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक राजू ईरानी सीधे वारदातों में कम नजर आता था, लेकिन पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता था। लूट और ठगी से मिलने वाली रकम का बंटवारा और हिसाब-किताब भी वही तय करता था।
ईरान से भोपाल तक अपराध की जड़ें
आजादी के बाद ईरान से आए कुछ परिवारों ने भोपाल रेलवे स्टेशन के पास डेरा डाला था। इन्हीं में से मुन्ने ईरानी अपराध की दुनिया में उतरा। पुलिस की लगातार दबिश से बचने के लिए उसने करोंद क्षेत्र के पास नया ठिकाना बनाया, जो आगे चलकर ‘ईरानी डेरा’ बना। यहीं से पूरे देश में गैंग की गतिविधियां संचालित होने लगीं।
सूरत में छिपकर ली पनाह, ऐसे हुई गिरफ्तारी
लगातार पुलिस दबाव के चलते राजू ईरानी सूरत में अपने साढ़ू के घर छिपा हुआ था। भोपाल पुलिस को लगातार लोकेशन इनपुट मिलते रहे और सूरत पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। अब उससे गैंग के नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन, फर्जी जमानत और अन्य राज्यों के मामलों को लेकर पूछताछ की जा रही है।
पिता के जीवित रहते संभाली गैंग की कमान
पहले गैंग की कमान मुन्ने ईरानी के हाथ में थी। उसकी मौत के बाद उसका शागिर्द राजू ईरानी सरगना बन गया। वर्ष 2000 में उसने अपने पिता के जीवित रहते ही गिरोह की कमान संभाल ली। 2006 में उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ और इसके बाद करीब 25 वर्षों तक उसने अपराध की दुनिया में अपना वर्चस्व बनाए रखा। लूट की रकम से उसने भोपाल में अरबों की संपत्ति खड़ी की। वह लग्जरी कारों और अरबी नस्ल के घोड़ों का शौकीन बताया जाता है। पुलिस के अनुसार गैंग के भीतर विवाद सुलझाने के लिए वह समानांतर अदालत भी चलाता था।

अलग-अलग भेष, हर तरह के अपराध
गैंग के सदस्य कभी पुलिस, कभी सीबीआई तो कभी सेल्स टैक्स अधिकारी बनकर लोगों को डराते और लूट-ठगी करते थे। जानबूझकर भोपाल में कम वारदातें की जाती थीं ताकि स्थानीय पुलिस की नजरों से बचे रहें। पकड़े जाने पर गैंग सदस्य किसी का नाम न बताएं, इसके लिए उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी। गिरफ्तारी की स्थिति में जमानत और परिवार की जिम्मेदारी भी गैंग उठाता था।
ड्रग्स कारोबार में महिलाओं की एंट्री
ईरानी गैंग ड्रग्स तस्करी में भी शामिल रहा है। महिला आरक्षकों की कमी का फायदा उठाकर गैंग ने महिलाओं को इस धंधे में उतार दिया। बाद में यह कारोबार राजू ईरानी की एक महिला करीबी के हाथों में चला गया, जिसे ‘ड्रग्स की रानी’ कहा जाता है। यह महिला फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।















