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Bhopal : भोपाल एम्स के इमरजेंसी एवं ट्रॉमा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा का सोमवार को निधन हो गया। वे 11 दिसंबर को आत्महत्या के प्रयास के बाद से एम्स के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। 24 दिनों तक चले उपचार, विशेषज्ञों की निगरानी और तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी एम्स प्रबंधन के अनुसार, 5 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे डॉ. रश्मि वर्मा ने अंतिम सांस ली। निधन के बाद उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया। बताया गया है कि उन्होंने बेहोशी की दवा (एनेस्थीसिया) की हाई डोज ली थी। उनके पति, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य, उन्हें बेहोशी की हालत में एम्स लेकर पहुंचे थे।
7 मिनट तक रुकी थी धड़कन
डॉक्टरों के मुताबिक, एम्स पहुंचने से पहले करीब 25 मिनट का समय बीत चुका था। इस दौरान डॉ. रश्मि का दिल लगभग 7 मिनट तक धड़कना बंद रहा। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सकों ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और तीन बार रेससिटेशन के बाद उनकी हार्टबीट बहाल की जा सकी, लेकिन लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी हालत गंभीर बनी रही।

वर्क कल्चर पर सवाल
डॉ. रश्मि वर्मा के मामले के सामने आने के बाद एम्स के कथित टॉक्सिक वर्क कल्चर को लेकर भी सवाल उठे थे। सहकर्मियों और चिकित्सा समुदाय के बीच कार्यस्थल पर मानसिक दबाव, लंबे ड्यूटी घंटे और सपोर्ट सिस्टम को लेकर चर्चा तेज हुई थी। हालांकि, संस्थान की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।















