
बहराइच, जरवल। जरवलरोड बाजार निवासी राम जी जायसवाल भले ही लगभग 20 वर्षों से कुछ भी देख नहीं सकते, इसके बावजूद भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत जरूर बन गए हैं। अविवाहित राम जी ने जरवलरोड बाजार में स्थित शिव मंदिर में सुरक्षा के लिए दृश्य से, वह भी मेहनत-मजदूरी के बचाए हुए पैसे से, एक गेट लगवा दिया। इससे समाज के लोगों को जरूर सीख लेनी चाहिए। वह कहते हैं, “जब मैं था, तब हरि नहीं; अब मैं हूं, हरि नाहि।”
राम जी जायसवाल ने कहा कि उन्हें समाज की सेवा और धार्मिक कार्यों में बहुत रुचि है। लेकिन मैं कुछ भी देख नहीं सकता, इसे भी ईश्वर का प्यार, सहयोग न कहूं तो और क्या है। राम जी जायसवाल दृष्टि बाधित होने के बावजूद भी आस्था, परोपकार और दानशीलता का अद्भुत भाव रखते हैं। यह समाज की आंखें खोलने वाला है।
लगभग पंद्रह वर्ष पूर्व, प्राचीन शिव मंदिर जरवलरोड में, अपनी कमाई से उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित द्वार का फाटक लगवाकर उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची सेवा केवल साधनों से नहीं, बल्कि नेक इरादों और विशाल हृदय से होती है। आपकी यह उदारता और श्रद्धा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
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