
बस्ती: आर्य समाज नई बाजार बस्ती में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में यज्ञ करते हुए लोगों ने योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्म दिवस के बाद वैदिक यज्ञ कर उनके आदर्शों पर चलने का व्रत लिया। गरुण ध्वज पांडेय और देवव्रत आर्य ने लोगों को पंच तत्वों के बारे में बताते हुए कहा कि इनका कर्ज हमारे ऊपर होता है। यज्ञ से इन तत्वों को शुद्ध करके हम इस ऋण से मुक्त हो सकते हैं।
इस अवसर पर ओम प्रकाश आर्य, प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती, ने योगेश्वर श्रीकृष्ण का सत्य स्वरूप बताते हुए कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण पुण्यात्मा, धर्मात्मा, तपस्वी, त्यागी, योगी, वेदज्ञ, निरहंकारी, कूटनीतिज्ञ, लोकोपकारक आदि अनेक गुणों और विशेषणों से विभूषित थे। वे मानवता के रक्षक, पालक और उद्धारक थे। उनका उद्देश्य था कि धर्मात्माओं की रक्षा हो और पापी, अपराधी तथा दुष्ट प्रकृति के लोगों का नाश हो।
संसार के इतिहास में श्रीकृष्ण जैसा विलक्षण, अद्भुत और अद्वितीय महापुरुष नहीं मिलेगा। यदि किसी महापुरुष में वेद, दर्शन, योग, अध्यात्म, संगीत, कला, राजनीति, कूटनीति आदि सभी गुण देखे जाएं, तो वह अकेले देवपुरूष श्रीकृष्ण हैं। महाभारत में अनेक विशेषताओं से युक्त महापुरुष हुए, लेकिन उनका जन्मदिन मनाया नहीं जाता। हजारों वर्षों के बाद भी श्रीकृष्ण का जन्मदिन सबको याद है। जो महापुरुष संसार, मानवता, सत्य-धर्म, न्याय और सर्वेभवन्तु: सुखिन: के लिए जीता और मरता है। जहां धर्म है, वहां श्रीकृष्ण हैं और जहां श्रीकृष्ण हैं, वहां निश्चित ही विजय होगी।
संसार का दुर्भाग्य है कि श्रीकृष्ण के सत्य स्वरूप और जीवन दर्शन के साथ अन्याय और विकृति जुड़ गई। पुराणों में श्रीकृष्ण को युवा होने ही नहीं दिया गया; बाल लीलाओं में उनका सम्पूर्ण जीवन अंकित व चित्रित होकर रह गया। महाभारत में राधा का नाम कहीं नहीं आता, किन्तु राधा के बिना श्रीकृष्ण की कल्पना प्रस्तुत की जा रही है। पुराणों, लोक कथाओं और कहानियों में श्रीकृष्ण के चरित्र को कलंकित और विकृत करने के लिए राधा का नाम जोड़ा गया। इतिहास में मिलावट हुई। श्रीकृष्ण पत्नीव्रता थे और उनकी धर्म पत्नी रुक्मिणी थीं।
आर्य समाज का उदय सत्य के प्रचार-प्रसार और वैदिक धर्म के पुनरुद्धार के लिए हुआ। आर्य समाज महापुरुषों के उज्जवल, प्रेरक और चारित्रिक गरिमा की रक्षा का सदा पक्षधर रहा है। आर्य समाज श्रीकृष्ण के विकृत और कलंकित स्वरूप को स्वीकार नहीं करता। आर्य समाज उन्हें योगीराज, दिव्य गुणों से युक्त महापुरुष मानता और सम्मानित करता है।
इस श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर हमें उनके जीवन दर्शन, गीता-ज्ञान, शिक्षाओं और उपदेशों का चिंतन और नमन करना चाहिए। ऐसे महापुरुष के जीवन से हमें उनके दिये गये उपदेशों, संदेशों, विचारों और ग्रंथों पर चिंतन-मनन और आचरण की शिक्षा लेनी चाहिए।
इस अवसर पर देवव्रत आर्य, धर्मेंद्र कुमार, रतन बरनवाल, नितीश कुमार, शिव श्याम, रजनीश कुमार, गणेश आर्य, विश्वनाथ आर्य, महिमा आर्य रिमझिम, राजेश्वरी गौतम, दृष्टि मोदनवाल सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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