
Basti : कुदरहा विकास खण्ड अंतर्गत भंगुरा ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत में 68 मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टररोल तैयार कर सरकारी धन की निकासी की जा रही है। कागजों में मजदूरों को कार्यरत दर्शाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य और मजदूरों की मौजूदगी संदिग्ध बताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन मजदूरों के नाम मस्टररोल में दर्ज हैं, उनमें से कई लोगों ने न तो कभी मनरेगा के तहत काम किया और न ही वे कार्यस्थल पर नजर आए। इसके बावजूद उनकी फर्जी हाजिरी दर्ज कर भुगतान निकालने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे योजना का मूल उद्देश्य—गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना—पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पंचायत में चल रहे मनरेगा कार्यों की न तो नियमित निगरानी हो रही है और न ही निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है। रोजगार सेवक, पंचायत स्तर के कर्मचारी तथा अन्य जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यह फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से किया गया, ताकि बिना काम कराए ही सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सके।
मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आना बेहद चिंताजनक है। सरकार ने योजना के तहत पारदर्शिता और मजदूरों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार के मामले इन प्रयासों को कमजोर कर रहे हैं। भंगुरा ग्राम पंचायत का यह मामला पूरे विकास खण्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से करने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया तो ऐसे फर्जीवाड़े और बढ़ सकते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि मस्टररोल की गहन जांच कराई जाए और जिन मजदूरों के नाम से फर्जी हाजिरी लगाई गई है, उनसे पूछताछ की जाए।
प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सूत्रों की मानें तो मामला उजागर होने के बाद विभागीय हलचल तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी रोजगार सेवक, पंचायत सचिव और अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
भंगुरा ग्राम पंचायत में सामने आया यह मामला एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी और ईमानदारी से लागू करने के लिए कड़ी निगरानी, नियमित जांच और जवाबदेही बेहद आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप को कितनी प्राथमिकता देता है और कब तक दोषियों पर कार्रवाई होती है।










