
Banda : महिला शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षिकाओं ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को सेवारत शिक्षकों के लिए अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ विरोध जताया। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सांसद को सौंपकर शिक्षिकाओं ने इसे लाखों शिक्षकों की नौकरी और आजीविका पर खतरा बताते हुए टीईटी अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग की।
महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष सुधा सिंह राजपूत की अगुवाई में शनिवार को शिक्षिकाओं ने सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध जताया। कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार आरटीई एक्ट में 10 अगस्त 2017 के संशोधन के तहत देश भर के बेसिक शिक्षा के सभी सेवारत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे लाखों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। एनसीटीई की गाइडलाइंस के अनुसार अधिकांश सेवारत शिक्षक आयु सीमा और अन्य शर्तों के कारण टीईटी परीक्षा देने के लिए पात्र ही नहीं हैं। ऐसे में यह नियम लागू होना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। इससे लाखों शिक्षकों की नौकरी और आजीविका पर खतरा मंडरा जाएगा।
महिला शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सांसद कृष्णा शिवशंकर सिंह पटेल को सौंपा। मांग की कि संसद में इस मुद्दे को उठाया जाए और सेवारत शिक्षकों को टीईटी से छूट दिलाई जाए।
ज्ञापन देने वालों में सावन कुमारी भारती, दीपा, रानी देवी सिंगरौल, सुनीता देवी, सुशीला, अंजुम, वंदना, ज्योति, रोशनी, अंजलि, दीपा, कमला, शाहीन, मीरा रविकुल, रंजना, अंजना, नम्रता, नेहा आदि शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।












