
- विश्वस्तरीय जर्मन हैंगर तकनीक से तैयार किया जा रहा कथा का भव्य पंडाल
बांदा : शहर के मवई बाईपास स्थित मैदान में 16 से 20 जनवरी तक आयोजित होने वाले आस्था के महाकुंभ में बागेश्वरधाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री श्री हनुमंत कथा का रसपान कराएंगे और दिव्य दरबार सजाकर लोगों की अर्जी स्वीकार करेंगे।
बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने और समाज में धार्मिक व सामाजिक समरसता कायम रखने के लिए आयोजक मंडल के लोग गांव-गांव भ्रमण कर लोगों को आमंत्रण दे रहे हैं। वहीं, कथा पंडाल पर तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।
सोमवार को बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन के संस्थापक एवं भाजपा नेता प्रवीण सिंह ने कथा स्थल पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया और सभी व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त रखने की हिदायत दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन समेत पुलिस, विद्युत, स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका के साथ समन्वय स्थापित करके सभी तैयारियां पूरी कराई जा रही हैं। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था के साथ ही आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की विस्तृत योजना तैयार की गई है।
कथा आयोजक प्रवीण सिंह ने कथा पंडाल का भ्रमण कर तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया और कार्यकर्ताओं को खामियां दुरुस्त करने की हिदायत दी। साथ ही प्रशासनिक अमले के साथ समन्वय बैठक करके व्यवस्थाओं को परखा। उन्होंने बताया कि बागेश्वरधाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के लिए जर्मन हैंगर तकनीक से विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है। पूरा पंडाल वाटरप्रूफ, फायर-रेसिस्टेंट और बेहतर वेंटिलेशन सुविधा से लैस है।
कथा संयोजक श्री सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन की ओर से कथा स्थल में ऐसी फुल-प्रूफ व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को बागेश्वरधाम सरकार के दिव्य दर्शन और कथा का लाभ सुगमता और सरलता से मिल सके। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक और प्रशासनिक सहयोग से एक सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में धार्मिक एवं सामाजिक समरसता स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी को विशाल कलश यात्रा के साथ कार्यक्रम का आगाज होगा और 16 से 20 जनवरी तक बागेश्वरधाम सरकार के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के श्रीमुख से हनुमंत कथा का रसपान कराया जाएगा। हनुमंत कथा के दौरान दिव्य दरबार भी सजेगा।











