बांदा : क्लासरूम में छात्रा की मौत की मजिस्ट्रियल जांच शुरू

  • कमासिन थाने के कुमेंढ़ासानी में छात्रा की हुई थी मौत
  • शिक्षकों समेत पूरे विद्यालय स्टाफ पर दर्ज है मुकदमा

बांदा। जिला मजिस्ट्रेट जे.रीभा ने कमासिन थाना क्षेत्र के कुमेंढ़ा सानी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में छात्र से मामूली झगड़े के दौरान कक्षा पांच की छात्रा की मौत के मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच अधिकारी उप जिला मजिस्ट्रेट बबेरू को नामित किया गया है। उधर मामले में आरोपी छात्र समेत प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षा मित्र और दो रसोइयों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज करके पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।

बता दें कि 26 अगस्त की सुबह कमासिन क्षेत्र के कुमेंढ़ासानी गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पांच के छात्र आशीष पुत्र हरिश्चंद्र और छात्रा गोमती पुत्री देवीचरन के बीच झगड़ा हो गया था। झगड़े के दौरान आशीष ने गोमती का गला दबा दिया, जिससे उसकी थोड़ी देर बाद मौत हो गई। मामले को लेकर परिजनों ने हो हल्ला मचाया तो पुलिस ने मृतका की मां किरन देवी की तहरीर पर आरोपी छात्र आशीष समेत प्रधानाध्यापक महेश पाल, सहायक अध्यापक जितेंद्र कुमार, शिक्षामित्र राजनारायण, रसोइया शिवदुलारी और विमला देवी के खिलाफ नामजद मुकदमा पंजीकृत करके जांच शुरू कर दी। उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट जे.रीभा ने पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेटीयल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित जांच अधिकारी उप जिला मजिस्ट्रेट बबेरू अवनीश कुमार ने घटना के संबंध में किसी भी प्रकार के साक्ष्य व बयान दर्ज कराने के लिए 10 सितंबर तक की तारीख नियत की है। कहा है कि 10 सितंबर के पूर्व घटना के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी उनके कार्यालय में पहुंचकर साझा की जा सकती है।

पुलिस अधीक्षक से मिला प्राथमिक शिक्षक संघ

क्लासरूम में छात्रा की मौत के मामले में शिक्षकों व विद्यालय के स्टाफ पर एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने आक्रोश जताया है। मामले को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करके मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। कहा है कि घटना छात्र और छात्रा के बीच झगड़े के दौरान घटित हुई है, ऐसे में शिक्षकों व रसोइयों के खिलाफ नामजद एफआईआर किया जाना गलत है। संघ के जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी ने निष्पक्ष जांच कराकर शिक्षकों व स्टाफ पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग उठाते हुए कहा है कि इस मामले में शिक्षकों को दोषी नहीं करार दिया जा सकता। ऐसे में जहां शिक्षकों का मनोबल टूटेगा, वहीं शिक्षकों के प्रति आम जनमानस में सम्मान भी घटेगा। उन्होंने शिक्षकों व स्टाफ के खिलाफ दर्ज मामला निरस्त न किए जाने पर आंदोलन करने का अल्टीमेटम दिया है।

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