
ईंट भट्ठे पर परिवार को टीके का महत्व समझाते डब्लूएचओ एसएमओ विपिन लिखोरे और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा0 एसके सिंह
- तीन चरणों में चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान
- 318 भट्ठों पर 2500 से अधिक बच्चे व गर्भवती महिलाएँ होंगी सुरक्षित
Bahraich : जनपद में ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी और श्रमिक परिवारों के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग विशेष टीकाकरण अभियान शुरू करने जा रहा है। यह अभियान तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसमें 0 से 5 वर्ष तक के लगभग 2500 बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लक्षित किया गया है। सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि प्रवासी श्रमिक परिवारों की निरंतर आवाजाही के कारण उनके बच्चे नियमित टीकाकरण सेवाओं से वंचित रह जाते हैं, जिसका असर बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व पर पड़ता है। इसी चुनौती को देखते हुए जनपद के 318 ईंट-भट्ठों की पहचान कर विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है, ताकि कोई बच्चा और कोई गर्भवती महिला सेवाओं से वंचित न रहे।
तीन चरणों में चलेगा अभियान-
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस. के. सिंह ने बताया कि अभियान तीन चरणों में संचालित होगा। पहला चरण 15, 16, 19 और 20 जनवरी, दूसरा चरण 16, 17, 19 और 20 फरवरी, जबकि तीसरा चरण 23, 24, 27 और 30 मार्च को आयोजित किया जाएगा। इन तिथियों के दौरान स्वास्थ्य टीमें ईंट-भट्ठों पर जाकर बच्चों को निर्धारित टीके लगाएंगी, गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच, टीकाकरण और परामर्श प्रदान करेंगी। साथ ही अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व और समय पर अगला टीका लगवाने के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस अभियान में आशा, एएनएम और स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी अहम भूमिका निभाएंगे।
इन बीमारियों से मिलेगी सुरक्षा-
डब्ल्यूएचओ एसएमओ डॉ. विपिन लिखोरे ने बताया कि टीकाकरण जन्म से पाँच वर्ष तक के बच्चों को टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी. डिप्थीरिया, टिटनेस, मीजल्स, परट्यूटिस (काली खांसी), रूबेला, निमोनिया, वायरल डायरिया, जेई , हेपटाइटिस टाईप बी और रोटावायरस जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। गर्भवती महिलाओं को भी टीडी के दो टीके लगाए जाते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी मुकेश चंद्र ने बताया कि ईंट-भट्ठे दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित होने के कारण वहाँ रहने वाले परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच चुनौतीपूर्ण रहती है। इसी कारण प्रशासन ने विशेष रणनीति बनाकर भट्ठों पर ही शिविर लगाने का निर्णय लिया है, ताकि हर पात्र गर्भवती और बच्चा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके और कोई भी छूट न पाए।











