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DU समेत अन्य विश्वविद्यालयों में चल रहे चार वर्षीय बीएलएड कोर्स को 2026-27 से बंद कर दिया जाएगा। इसे नए शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम, आईटीईपी (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) में बदला जाएगा। यह प्रस्ताव राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की ओर से दिया गया है। बीएलएड कोर्स, जो कि एक चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम है, 1994-95 में दिल्ली विश्वविद्यालय में शुरू हुआ था और 1999 में एनसीटीई ने इसे मान्यता दी थी।
एनसीटीई के हालिया ड्राफ्ट के अनुसार, 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से बीएलएड कोर्स को बंद कर दिया जाएगा और जिन संस्थानों में यह कोर्स चल रहा है, वहां नए प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, इन संस्थानों को बीएलएड कोर्स में नामांकित छात्रों को इस शर्त पर जारी रखने की अनुमति होगी कि वे 2026-27 से पहले आईटीईपी में प्रवेश लें।
एनसीटीई के चेयरमैन पंकज अरोड़ा ने बताया कि इस साल बीएलएड में दाखिले की अनुमति दी जाएगी, लेकिन 2026 के बाद से प्रवेश नहीं होंगे। इस बदलाव का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नया शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम लागू करना है।
आईटीईपी को 2023-24 शैक्षणिक सत्र में कुछ संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था, लेकिन 2025-26 से यह एक नियमित कोर्स के रूप में पेश किया जाएगा। इस नए कोर्स में चार विशेषज्ञताएं – योग, शारीरिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और कला शिक्षा – होंगी।
देश भर में करीब 90-95 संस्थान बीएलएड कोर्स चला रहे हैं। एनसीटीई के मसौदे में यह भी कहा गया है कि बीएड और एमएड कोर्स में प्रवेश एनटीए द्वारा आयोजित एक विषय और योग्यता परीक्षा के माध्यम से होगा, जैसा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सीयूईटी-यूजी और सीयूईटी-पीजी के जरिए होता है।