अररिया : नेपाल में गोलीकांड के विरोध में सीमा पर प्रदर्शन, सशस्त्र पुलिस पर कार्रवाई की मांग

अररिया : नेपाल के सुनसरी के लौकही में सशस्त्र पुलिस बल द्वारा तस्करी के आरोप में किए गए गोलीबारी की घटना के विरोध में जोगबनी के भारत-नेपाल सीमा स्थित रानी-जोगबनी नाके पर शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया गया।

शनिवार को किए गए इस प्रदर्शन की अगुवाई मोरंग जिले के जेन जी प्रतिनिधि जमशेद रोज, ईशान खान, सुजित साह, अमिता गिरी सहित दर्जनों की संख्या में पहुंचे स्थानीय नागरिकों के साथ प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान जेनजी प्रतिनिधि ने कहा की घरेलू उपयोग के सामग्री भारत से नेपाल लाने के दौरान नेपाल सशस्त्र पुलिस बल ने गोली चलाकर एक साधारण नागरिक की जान ले ली। इस घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रदर्शनकारियों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं कानून चलाओ, राज्य टैक्स खाता है, जिम्मेदारी से भागता है,वर्दी से हत्या ढकना नहीं चाहिए,समस्या गरीबी है, गरीब नहीं,आज विजय, कल किसका, स्टॉप किलिंग सिटीजन,महंगाई घटाओ, जनता बचाओ आदि नारे लगाए गए।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मोरंग जेनजी के प्रतिनिधि जमशेद रोज ने राज्य पर जनता के प्रति जवाबदेह न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यदि स्वदेश में ही सस्ते दाम पर सामान उपलब्ध होता तो सीमा पार जाकर खरीददारी करने की मजबूरी न होती। नेपाल में आलू प्रति किलो 40 रुपये है तो भारत के जोगबनी बाजार में 20 रुपये में मिल जाता है। खुली सीमा होने से लोगों को मजबूर होकर सीमा पार जाना पड़ता है। लेकिन राज्य सुविधा देने के बजाय गरीबों पर गोली चलाना, मारपीट करना और सामान छीनने का कार्य करती है, जो कदापि स्वीकार्य नहीं है।वही ईशान खान ने सरकार से लेकर पुलिस प्रशासन तक दमनकारी बने होने का आरोप लगाते हुए मृतक विजय की कोई गलती न होने की बात कही।सशस्त्र पुलिस का यह कार्य अमानवीय और अस्वीकार्य है। कल सुनसरी में हुआ, आज हमारे यहां भी हो सकता है। जब पुलिस प्रशासन से ही जान सुरक्षित न हो, तो नागरिक सुरक्षा की गुहार कहां लगाए, सवाल किया।

प्रदर्शनकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच, दोषी सशस्त्र पुलिस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई, मृतक परिवार को उचित मुआवजा तथा सीमावर्ती क्षेत्र में होने वाले दमन को तत्काल रोकने की मांग नेपाल सरकार से की।

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