
America : अमेरिकी सेना की ओर से रूसी तेल टैंकर ‘मारिनेरा’ पर कब्जा करने के बाद मास्को का गुस्सा सातवें आसमान पर है। रूस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए वाशिंगटन से तुरंत जहाज और उस पर सवार तीन भारतीय सहित पूरे क्रू को रिहा करने की मांग की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को ‘खुली समुद्री डकैती’ करार देते हुए, अमेरिका पर मानवीय और विधिक मानकों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
नॉर्थ अटलांटिक महासागर में हुई इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। खासतौर पर, जहाज पर मौजूद क्रू मेंबर्स में तीन भारतीय भी शामिल हैं, जो अब फंसे हुए हैं। अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से गैरकानूनी है और इन सभी को तुरंत सुरक्षित लौटाने की मांग की है।
रूस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि “मारिनेरा” पर सवार क्रू में तीन भारतीय, 17 यूक्रेनी, 6 जॉर्जियाई और 2 रूसी नागरिक हैं। रूस का आरोप है कि अमेरिकी सेना ने बिना वैध अनुमति के इस नागरिक जहाज पर जबरदस्ती कब्जा किया है और क्रू पर मुकदमा चलाने की धमकी दी है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने एक सख्त बयान जारी कर कहा, “यह कार्रवाई समुद्री कानून का उल्लंघन है। जहाज को 24 दिसंबर को रूसी झंडे के तहत चलने की अनुमति मिली थी और यह शांतिपूर्ण तरीके से नॉर्थ अटलांटिक महासागर में गुजर रहा था। अमेरिकी सेना ने बिना किसी वैध आधार के इस नागरिक जहाज पर जबरदस्ती कब्जा किया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।”
मंत्रालय ने यह भी कहा कि, “अमेरिका को इन कार्रवाइयों को तुरंत रोकना चाहिए और जहाज व क्रू को तुरंत रिहा करना चाहिए। यह अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का घोर उल्लंघन है और इससे वैश्विक समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।”
रूस ने आगे कहा कि, “यह घटना स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक कदम है, जिसे एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से अंजाम दिया गया है। हम अमेरिकी सरकार से मांग करते हैं कि वे तुरंत इस कार्रवाई को वापस लें और क्रू के सदस्यों को सुरक्षित रूप से उनके देश लौटने दें।”
इस पूरी घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसने जहाज को जब्त किया है क्योंकि वह रूस के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और सैन्य नजरियों से संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त था।
ये मामला अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, विशिष्ट रूप से नेविगेशन अधिकारों और प्रतिबंधों के पालन को लेकर विश्वस्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, और इसकी परिणति वैश्विक राजनीति और समुद्री सुरक्षा नीति पर प्रभाव डाल सकती है।















