
पाँच साल की उम्र में चुना जो रास्ता; आज तक उसी पर चल रहे हैं अजमेर के अभिमन्यु कनोदिया; जॉर्जिया में मिली शॉर्ट फिल्म को जगह
3,005 एंट्रीज़ में से शीर्ष 15 नामांकित फिल्मों में से एक अभिमन्यु कनोदिया की
अजमेर, 29 अगस्त 2025: “सपनों को हकीकत में बदलने के लिए हिम्मत चाहिए, और हिम्मत तब और मायने रखती है जब रास्ता आसान न हो।” यह पंक्ति शायद सबसे बेहतर ढंग से बताती है उस युवा फिल्मकार की कहानी, जो अजमेर की गलियों से निकलकर दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवल्स तक अपनी छाप छोड़ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं व्हिस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल (डब्ल्यूडब्ल्यूआई) के एल्युमिनी छात्र, अभिमन्यु कनोदिया की।

अजमेर में जन्मे अभिमन्यु कनोडिया इसी शहर में पले-बढ़े। अभिमन्यु को सिनेमा में रुचि महज़ चार-पाँच साल की उम्र में ही हो गई थी, जिसमें उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान था। परिवार की परंपरा थी कि वे फिल्म के रिलीज़ होने के पहले दिन का आखिरी शो देखने जाते थे, और यही परंपरा अभिमन्यु के जुनून का कारण बन गई।
इंतज़ार कर रहा था पहला प्रोजेक्ट
1994-1995 में उन्होंने कई यादगार फिल्में देखीं, जैसे हम आपके हैं कौन, बैंडिट क्वीन और हिंदी में डब की गई जुरासिक पार्क और स्पीड। हम आपके हैं कौन ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। अभिमन्यु ने स्कूल थिएटर और नाटकों में भाग लिया और चार्टर्ड अकाउंटेंसी करते हुए फिल्मों की समीक्षा लिखते रहे। कारण कि मुंबई आने का उनका प्रारंभिक उद्देश्य चार्टर्ड अकाउंटेंसी पूरा करना था, लेकिन सिनेमा का जुनून हमेशा सातवें आसमान पर रहा। वर्ष 2013 में सीए पूरा करने के बाद उन्होंने व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल (डब्ल्यूडब्ल्यूआई) में प्रवेश लिया। यहाँ से उन्होंने अपनी पहली शॉर्ट फिल्म बनाई, जिसे स्टूडेंट ऑस्कर्स में सेमी-फाइनलिस्ट का दर्जा मिला। डब्ल्यूडब्ल्यूआई ने उनकी पहली दो पेड फिल्मों के अवसर मुक्ता आर्ट्स (जैंगल बेल्स, 2015 और क्वीन ऑफ हार्ट्स, 2016) दिलवाए। उनकी पहली ही शॉर्ट फिल्म ‘कथाकार’, जिसमें मशहूर अभिनेता पियूष मिश्रा नज़र आए, ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। यह फिल्म 43वें स्टूडेंट एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर्स) 2016 में फॉरेन नैरेटिव कैटेगरी की टॉप 5% एंट्रीज़ में शामिल रही और 20 से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर 30 से ज्यादा फिल्म फेस्टिवल्स में प्रदर्शित हुई।
द फर्स्ट ब्रेक #द रील गेम और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता
हाल ही में अभिमन्यु की नई शॉर्ट फिल्म द फर्स्ट ब्रेक ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। इस फिल्म को जॉर्जिया में आयोजित 5वें मेस्टिया इंटरनेशनल शॉर्ट एंड माउंटेन फिल्म फेस्टिवल (29 जुलाई-3 अगस्त, 2025) के लिए चयनित किया गया। इस वर्ष दुनियाभर से आई 3,005 एंट्रीज़ में से शीर्ष 15 नामांकित फिल्मों में इसे जगह मिली। और सबसे गर्व की बात यह है कि द फर्स्ट ब्रेक इस साल की एकमात्र भारतीय फिल्म है, जिसने यह मुकाम हासिल किया है। फिल्म ने स्पेशल मेन्शन जूरी अवॉर्ड भी जीता और जागरण फिल्म फेस्टिवल 2025 में चौदह भारतीय शहरों में प्रदर्शित होगी।
हर कदम पर खुद को करते रहे साबित
इसके बाद अभिमन्यु ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। डाइस मीडिया और द ज़ूम स्टूडियोज़ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए उन्होंने कई हिट वेब सीरीज़ और शॉर्ट फिल्में निर्देशित कीं- टेप: ए लव स्टोरी, सौ ग्राम ज़िंदगी, तेरा यार हूँ मैं जैसी फिल्मों को यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 4 करोड़ से अधिक व्यूज़ मिले। एमटीवी इंडिया ने उन्हें देश के शीर्ष तीन युवा निर्देशकों में शामिल किया और अभिनेत्री राधिका आप्टे के साथ उनके काम को राष्ट्रीय मंच पर सराहा।
उनका काम सिर्फ स्टोरीटेलिंग तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने डॉक्यूमेंट्रीज़ और विज्ञापन फिल्मों में भी अपनी पकड़ साबित की। मैं थांसु दूर नहीं (जो जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह पर आधारित थी) का चयन 18वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024 में हुआ। वहीं, कनेक्ट1 के लिए निर्देशक और लेखक के रूप में, अभिमन्यु ने ‘क्वीन ऑफ हार्ट्स’ और ‘जैंगल बेल्स’ जैसी शॉर्ट फिल्में बनाई। उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘बियॉन्ड द टाइड्स’ में उन्होंने चीन की अलग-अलग सांस्कृतिक कहानियों को दिखाया।
म्यूजिक वीडियो में भी किसी से पीछे नहीं
उनके म्यूजिक वीडियोज़ ‘तुम भी ना’, ‘काहे कोई आँसू’ और ‘ओ बंदेया’ काफी लोकप्रिय हुए। क्रेओ किचन के टीवी विज्ञापन और मुक्ता ए2 सिनेमा ब्रांड फिल्म की डायरेक्शन में भी उनका काम शानदार रहा।
आज, जब द फर्स्ट ब्रेक दुनिया भर के दर्शकों तक पहुँच रही है, अभिमन्यु कहते हैं, “मेरे लिए हर फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक संवाद है। यह संवाद कभी समाज से होता है, कभी इतिहास से और कभी खुद से।”
निस्संदेह, अजमेर से निकला यह नौजवान फिल्मकार भारतीय सिनेमा की नई धारा को अपने साथ लिए आगे बढ़ रहा है। अभिमन्यु कनोडिया न सिर्फ अपनी कहानियों के ज़रिए दर्शकों को जोड़ रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए यह संदेश भी छोड़ रहे हैं कि सपनों की उड़ान आसमान छूने से पहले ज़मीन से शुरू होती है।