
AI In Healthcare: दुनियाभर में गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोगों को समय रहते जागरूक कर दिया जाए और शरीर के शुरुआती संकेतों को समझना सिखाया जाए, तो कई बीमारियों को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सकता है। हमारा शरीर खुद हमें संकेत देता है कि अंदरूनी तौर पर सब कुछ ठीक है या नहीं, लेकिन अक्सर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं।
आंखों, त्वचा, पेशाब या जीभ में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव कई बड़ी बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं। पुराने समय से ही डॉक्टर और वैद्य जीभ की जांच करके शरीर में संक्रमण, विटामिन की कमी, लिवर की समस्या या टॉक्सिन्स के बढ़ने का अंदाजा लगाते रहे हैं। अब इसी पारंपरिक पद्धति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़कर और ज्यादा सटीक बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का दावा है कि एआई की मदद से जीभ की जांच कर डायबिटीज, एनीमिया और यहां तक कि पेट के कैंसर (गैस्ट्रिक कैंसर) के शुरुआती लक्षणों का भी पता लगाया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने ऐसे एआई प्रोग्राम विकसित किए हैं, जो जीभ के रंग, बनावट और आकार में होने वाले सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण कर बीमारी की पहचान कर सकते हैं।
20 से अधिक अध्ययनों की समीक्षा में सामने आया है कि ये एआई सिस्टम इतनी सटीकता से लक्षणों की पहचान कर रहे हैं कि भविष्य में अस्पतालों में इन्हें जांच के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। चाइनीज मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट ने चिकित्सा जगत में नई उम्मीद जगाई है।
साल 2024 में टेक्नोलॉजीज जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एआई ने केवल जीभ की तस्वीरों के आधार पर 60 में से 58 डायबिटीज और एनीमिया मरीजों की सही पहचान की। यह सिस्टम हजारों मरीजों की जीभ की तस्वीरों से प्रशिक्षित किया गया है, जिससे यह बेहद बारीक बदलावों को भी पकड़ लेता है।
एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि जीभ पर मोटी परत, रंग का हल्का पड़ना और लाल धब्बे जैसे संकेत गैस्ट्रिक कैंसर से जुड़े हो सकते हैं। परीक्षण के दौरान एआई ने नए मरीजों में कैंसर की पहचान लगभग उतनी ही सटीकता से की, जितनी गैस्ट्रोस्कोपी या सीटी स्कैन जैसे टेस्ट करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जीभ को सेहत का आईना कहा जाता है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी के बायोइन्फॉर्मेटिक्स एक्सपर्ट प्रोफेसर डोंग जू बताते हैं कि एआई जीभ की तस्वीरों को क्लिनिकल डेटा के साथ मिलाकर बीमारियों की पहचान में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर समन वारनाकुलसुरिया के मुताबिक, जीभ लंबे समय से सामान्य स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक रही है।
चिकनी जीभ एनीमिया, सूखी जीभ डायबिटीज और मोटी सफेद परत संक्रमण का संकेत हो सकती है। एआई तकनीक के जरिए जीभ की तस्वीरों से समय रहते बीमारी का पता लगाया जा सकता है, जिससे न केवल इलाज आसान होगा बल्कि जांच पर लगने वाला समय और खर्च भी कम किया जा सकेगा।















