
दीव। तमिलनाडु की बीच वॉलीबॉल जोड़ी भरत और राजेश सिर्फ खेल में ही नहीं, बल्कि जीवन के सफर में भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। खेल में अपेक्षाकृत देर से पहचान बनाने वाले इस जोड़ीदार की दोस्ती कॉलेज के दिनों में मजबूत हुई, जहां समान परिस्थितियों और संघर्षों ने उन्हें एक-दूसरे के और करीब ला दिया।
भरत के पिता दिहाड़ी पर प्लंबर का काम करते हैं, जबकि राजेश के पिता चेन्नई में बस कंडक्टर हैं। आर्थिक स्थिरता जहां हमेशा परिवारों की पहली प्राथमिकता रही, वहां वॉलीबॉल को करियर के रूप में चुनना आसान फैसला नहीं था। बावजूद इसके, तमाम चुनौतियों को पार करते हुए भरत और राजेश ने दीव के घोघला बीच पर आयोजित *खेलो इंडिया बीच गेम्स (केआईबीजी) 2026* में लगातार दूसरी बार बीच वॉलीबॉल में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
टीम के कप्तान भरत ने कहा, “मेरे पिता दिहाड़ी पर प्लंबर हैं और राजेश के पिता बस कंडक्टर। हमारे आसपास कोई खास खेल माहौल नहीं था लेकिन कभी-कभी जुनून देर से जागता है। हमारे लिए यह कॉलेज के शुरुआती दिनों में हुआ।”
लॉयला कॉलेज, चेन्नई से वाणिज्य स्नातक भरत और राजेश ने अपने परिवारों को इस सफर का सबसे बड़ा सहारा बताया। उन्होंने कहा कि सीमित आर्थिक सुरक्षा और अनिश्चित भविष्य के बावजूद उनके परिवारों ने हमेशा उनके खेल करियर का समर्थन किया।
भरत ने कहा, “हम दोनों अभी शुरुआती 20 की उम्र में हैं और अच्छी बात यह है कि हमारे परिवारों ने हमें तुरंत नौकरी ढूंढने का दबाव नहीं दिया। अधिकांश भरतीय परिवारों में 23 साल की उम्र में भी खेल जारी रखना आसान नहीं होता। हमारी आय सीमित है लेकिन परिवार का पूरा समर्थन हमारे साथ है। उम्मीद है कि हमारे प्रदर्शन को पहचान मिलेगी।”
अनुभव और जोश का संतुलन इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत है। भरत 2025 के केआईबीजी में तमिलनाडु की रजत पदक विजेता टीम का हिस्सा रह चुके हैं, जबकि राजेश अपनी युवा ऊर्जा और रणनीतिक समझ से टीम को मजबूती देते हैं। यह जोड़ी तात्कालिक नतीजों से ज्यादा निरंतरता, तालमेल और दीर्घकालिक प्रगति पर ध्यान दे रही है।
भरत ने कहा, “मैं 2024 में दीव में हुए खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा था और पिछले साल उद्घाटन खेलो इंडिया बीच गेम्स में रजत पदक जीता। इस साल भी लय बनाए रखने से खुशी है।”
चयन ट्रायल में स्वर्ण पदक जीतकर अप्रैल में चीन में होने वाली एशियन बीच वॉलीबॉल चैंपियनशिप के लिए पहले ही क्वालिफाई कर चुकी यह जोड़ी अब अगले महीने होने वाले राष्ट्रीय शिविर की तैयारी में जुटी है।
तमिलनाडु की इस जोड़ी के लिए केआईबीजी 2026 एक विस्तारित तैयारी चरण की तरह है, जहां वे तकनीकी सुधार, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और मानसिक मजबूती पर काम कर रहे हैं, ताकि आने वाले चुनौतीपूर्ण सत्र के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।















