
जालंधर (गोराया) : जालंधर के गोराया कस्बे के मोहल्ला गुरु रविदास नगर निवासी मनदीप कुमार की कहानी एक ऐसे दर्दनाक सच को उजागर करती है, जिसमें विदेश में बेहतर कमाई और उज्ज्वल भविष्य के सपने ने उसकी जान ले ली। करीब तीन साल पहले एजेंटों के झांसे में आकर मनदीप विदेश गया था, लेकिन उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। आरोप है कि एजेंटों ने नौकरी दिलाने के नाम पर पहले उसे रूस भेजा और बाद में कथित तौर पर जबरन रूसी सेना में भर्ती करवा दिया।
परिजनों का कहना है कि मनदीप शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम नहीं था। उसकी टांग में गंभीर समस्या थी और वह कभी सेना में जाने का इच्छुक भी नहीं रहा। इसके बावजूद उसे रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे खतरनाक हालात में झोंक दिया गया। युद्ध के दौरान मनदीप की मौत हो गई। जब इसकी खबर परिवार तक पहुंची तो मानो सब कुछ उजड़ गया।
परिवार ने बेटे का शव लाने के लिए अपने स्तर पर रूस तक दौड़-भाग की। इस पूरी प्रक्रिया में एक साल से ज्यादा का समय लग गया। आखिरकार रविवार देर रात मनदीप का शव रूस से भारत लाया गया। परिजनों के मुताबिक, विदेश जाने के कुछ समय बाद ही मनदीप ने फोन कर घर वालों को बताया था कि हालात ठीक नहीं हैं और उसे जबरन सेना में शामिल किया गया है। इसके बाद 1 मार्च 2024 से उसका परिवार से पूरी तरह संपर्क टूट गया। महीनों तक परिजन किसी फोन कॉल या संदेश की उम्मीद में भटकते रहे, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।
जब दिल्ली से मनदीप का पार्थिव शरीर गोराया स्थित उसके घर पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया। घर में चीख-पुकार मच गई। मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और पिता बेटे का ताबूत देखकर फफक-फफक कर रो पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने परिजनों को ढांढ़स बंधाने की कोशिश की, लेकिन बेटे को खोने का दर्द किसी भी दिलासे से कम नहीं हो सका। मनदीप की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और एजेंटों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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