
- ‘न कोई प्रत्यावेदन, न कोई जानकारी, महज केजीएमयू की छवि धूमिल करने की कोशिश’- डॉ. के.के. सिंह
Lucknow : पिछले कुछ दिनों में केजीएमयू प्रदर्शन का अड्डा सा बन गया है जी हां इस बार प्रदर्शन किसी हिंदू संगठन या किसी पार्टी द्वारा नहीं किया गया बल्कि ये प्रदर्शन सपेरों द्वारा किया गया। केजीएमयू के गेट नंबर दो पर अखिल भारतीय सपेरा महासभा की तरफ से बीन बजाकर प्रदर्शन किया गया। सपेरा महासभा के अध्यक्ष श्रीपतनाथ सपेरा ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलित समाज के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए समर्पित हैं वहीं दूसरी तरफ केजीएमयू में समूह घ के नौकरियों में बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं और जिहादियों को संविदा पर नियुक्त किया जा रहा है।
सपेरा समाज ने केजीएमयू प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि लखनऊ में पीढ़ियों से रहने वाला सपेरा समाज बेरोजगार होकर भीख मांगने को मजबूर है लेकिन नौकरी जिहादी ताकतों को दी जा रही है। कुलपति कार्यालय में नियुक्त सैयद अब्बास और पर्यावरण सेल के डॉ. परवेज पर सपेरा समाज ने उनके रोजगार पर डाका डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

श्रीपत नाथ ने कहा कि आज हमने केजीएमयू के सामने बीन बजाकर इस विश्वविद्यालय में छुपे सपोलों को निकालने का आवाहन किया है, यदि यह सपोले हमारे अधिकारों का हनन करेंगे तो हम और भी व्यापक आंदोलन करेंगे। आगे सपेरा समाज ने चेतावनी देते हुए कहा कि केजीएमयू प्रशासन को इस पर जल्द से जल्द विचार करना ही होगा नहीं तो हम लोग जल्द ही सापों के साथ केजीएमयू परिसर में प्रवेश करेंगे।
क्या बोले केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह-
आठ-दस लोग आकर केजीएमयू गेट पर प्रदर्शन करने लगे, न तो उनके पास कोई प्रत्यावेदन था और न ही मुद्दे की कोई जानकारी। जब इन लोगों से प्रत्यावेदन मांगा गया तो क्या मुद्दे लिखकर दें इन लोगों को यह तक नहीं पता था, ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों ये किसी के बहकावे में आकर प्रदर्शन कर रहे हैं और केजीएमयू की छवि को धूमिल करने का काम कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन की वजह से जाम लगा और मरीजों की सेवा में बाधा पहुंची लेकिन पुलिस ने एक्शन नहीं लिया।










