
- हाईकोर्ट ने कब्जेदारों को दिया सिर्फ ‘पर्याप्त अवसर’ का मलहम
- टाउन हॉल और रंपा महल सहित 4 हवेलियों को नई नोटिस की तैयारी
- रानी कोठी और लाल कपड़ा कोठी का वजूद दांव पर, ईओ वैभव त्रिपाठी बोले-‘प्रशासन जल्द करेगा अगली स्ट्राइक’
Sitapur : शहर की ऐतिहासिक धरोहरों और बेशकीमती जमीनों पर बरसों से कुंडली मारकर बैठे अवैध कब्जाधारकों की धड़कनें एक बार फिर तेज हो गई हैं। सीतापुर के टाउन हॉल, रंपा महल, लाल कपड़ा कोठी और रानी कोठी जैसे ऐतिहासिक स्थलों को खाली कराने के मामले में उच्च न्यायालय ने प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई को आगे बढ़ाने की हरी झंडी दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि कोर्ट ने कब्जेदारों को कोई भी ‘स्टे’ (स्थगन आदेश) नहीं दिया है। हाईकोर्ट ने कब्जेदारों को सिर्फ ‘पर्याप्त अवसर’ का मलहम देते हुए प्रशासन को निर्देशित किया है। लेकिन नगर पालिका भी पीछंे हटने का नाम नहीं ले रहा है। पालिका ईओ वैभव त्रिपाठी ने दैनिक भास्कर को बताया कि प्रशासन जल्द ही अगली नोटिस जारी करेगा।
क्या है पूरा मामला और ऐतिहासिक विवाद?
सीतापुर के केंद्र में स्थित ये कोठियां और भवन कभी शहर की शान हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ इन पर अवैध तरीके से कब्जे कर लिए गए। नगर पालिका ने पूर्व में इन चारों संपत्तियों के कब्जेदारों को नोटिस जारी कर भवन खाली करने का अल्टीमेटम दिया था। इस कार्रवाई से शहर में हड़कंप मच गया था और मामला सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँच गया था। प्रशासन का तर्क है कि ये संपत्तियां नजूल या सरकारी श्रेणी की हैं, जबकि कब्जेदारों का दावा दशकों पुराने मालिकाना हक पर टिका है।
हाईकोर्ट की सुनवाई और प्रशासन का रुख
नोटिस जारी होने के बाद सभी कब्जेदार राहत की उम्मीद में हाईकोर्ट की शरण में गए थे। आज हुई सुनवाई के बाद नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी ने कोर्ट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय ने प्रशासन को सुसंगत नियमों के तहत कार्य करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। किसी भी भवन के पक्ष में ‘स्टे; न मिलना प्रशासन की बड़ी जीत मानी जा रही है।
अब आगे क्या होगा?
ईओ वैभव त्रिपाठी ने तेवर साफ करते हुए कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में नगर पालिका अब पुनः सभी को नए सिरे से नोटिस जारी करने जा रही है। इस बार प्रक्रिया को और अधिक कानूनी रूप से मजबूत बनाया जाएगा ताकि इन ऐतिहासिक धरोहरों को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर सरकार के पक्ष में वापस लाया जा सके। शहर के बीचों-बीच स्थित इन करोड़ों की संपत्तियों पर होने वाली इस आगामी कार्रवाई ने एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। शहरवासी टकटकी लगाए बैठे हैं कि क्या इस बार इन आलीशान कोठियों का वजूद प्रशासन के हाथ में होगा?










