
पाकिस्तान और सऊदी अरब के सैन्य समझौते के बाद तुर्किये के साथ मिलकर ‘इस्लामी नाटो’ बनाने की आशंका जग गई है। यह नई रणनीति अमेरिका पर घटते भरोसे और तीनों देशों के साझा हितों का परिणाम मानी जा रही है। भारत ने इसके जवाब में यूएई और इजरायल के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंध मजबूत कर लिए हैं।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए सैन्य समझौते का मकसद यह है कि यदि एक देश पर बाहरी हमला किया जाता है, तो दूसरे देश को भी उसकी रक्षा के लिए युद्ध में शामिल माना जाएगा। इस समझौते के तहत, सऊदी अरब को परमाणु हथियार से लैस देश बनाने का रास्ता साफ हो गया है, वहीं पाकिस्तान को संसाधनों से संपन्न सऊदी अरब का समर्थन मिलने की उम्मीद है। इस गठबंधन का उद्देश्य मध्य पूर्व और उससे जुड़े क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना है।
तुर्किये भी लंबे समय से इस्लामी देशों का नेतृत्व करने की इच्छा रखता है। तीनों देशों का मिलकर एक ‘इस्लामी नाटो’ बनाने का विचार तेजी से आकार ले रहा है, जिसमें इन देशों के साझा हित और सुरक्षा आवश्यकताएं शामिल होंगी। यह संगठन अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के प्रभाव को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोकस ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ पर है, और अमेरिका से घटते भरोसे के माहौल में, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये इस्लामी नाटो बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका का प्रभाव इन क्षेत्रों में कम हो रहा है, और नए भू-राजनीतिक समीकरण विकसित हो रहे हैं।
सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के मजबूत संबंध हैं, जो इसमें संसाधनों और रणनीतिक समर्थन के रूप में दिखाई दे रहे हैं। सऊदी अरब को परमाणु हथियार से लैस देश बनाने का रास्ता मिला है, जबकि पाकिस्तान को आर्थिक और संसाधनों में मदद मिल रही है। भारत, इस संघर्ष में, पाकिस्तान के साथ सीधे सैन्य हस्तक्षेप की बजाय आर्थिक मदद पर अधिक निर्भर रहने की रणनीति अपना सकता है।
तुर्किये इस संगठन में शामिल होकर अपने रक्षा उत्पादों का खाड़ी देशों में बाजार तलाश रहा है। तुर्किये की उन्नत रक्षा तकनीक का लाभ सऊदी अरब और पाकिस्तान भी उठा सकते हैं। यह संगठन क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदलने वाला है।
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के इस गठबंधन के मुकाबले में, भारत ने यूएई और इजरायल के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं। 19 जनवरी को, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए।
यह भी पढ़े : बर्थडे गर्ल के सामने न्यूड हो गए डीएसपी व दारोगा, फिर युवती ने 12 पुलिसकर्मियों को फंसाया, मोबाइल से खुला राज














