सीएम योगी पर अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणी से नाराज संत ने कहा- ‘माघ मेले में शाही स्नान जैसी कोई परंपरा नहीं’

Prayagraj : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या के शुभ अवसर पर आयोजित स्नान पर्व के दौरान पालकी रोके जाने को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विवादित बयान सुर्खियों में छा गया है। इस मामले ने न केवल धार्मिक हलकों में बल्कि राजनीतिक और संत समाज में भी तूल पकड़ लिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस घटना के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लिया है, जिसके बाद संतों की नाराजगी सार्वजनिक रूप से उभर कर सामने आई है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान पालकी रोके जाने और बैरिकेडिंग तोड़ने के दौरान साधु-संतों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले पर मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर गंभीर टिप्पणी की। उनके इस बयान के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने उनकी निंदा की।

महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी पर टिप्पणी करना अनुचित है। उन्होंने सवाल किया कि यदि राम मंदिर का निर्माण हुआ है और प्रयागराज में माघ मेले का आयोजन हो रहा है, तो इसमें दोष किसका है? उन्होंने कहा कि माघ मेले में शाही स्नान जैसी कोई परंपरा नहीं है, फिर भी यदि प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित किया, तो यह उचित था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई समस्या होती है, तो हम सरकार से ही बात करते हैं, ऐसे में विरोध क्यों?

महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि उनकी बात का मतलब यह नहीं है कि वे सीधे शंकराचार्य पर टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके अंदर अहंकार बहुत अधिक है, और बटुकों की पिटाई पर चिंता जताई। साथ ही यह भी कहा कि इसमें मुख्यमंत्री का कोई दोष नहीं है, पुलिस व्यवस्था में लगे अधिकारियों की दिशा-निर्देश से ही यह घटना हुई।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ संतों में नाराजगी भी देखने को मिली है। सतुआ बाबा ने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि गुरुजी, आप जानते हैं कि मैं आपके साथ रहा हूं, और गंगा तथा देश की बात पर हमेशा साथ रहा हूं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि संत समाज माला और भाला दोनों की भाषा जानता है।

हिंदू धर्म के अंतरराष्ट्रीय संत और हिंदू परिषद के संस्थापक डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने इस विवाद पर कहा कि यदि इस तरह का विवाद चलता रहा, तो हिंदू समुदाय बंट जाएगा। उन्होंने दोनों संतों को मिलकर विवाद सुलझाने का सुझाव दिया। तोगड़िया ने कहा कि दोनों मिलकर हिंदू एकता और सम्मान का रास्ता स्वयं खोज सकते हैं।

महंत हरिगिरि ने कहा कि इस घटना से प्रयागराज की मर्यादा धूमिल हो रही है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं इस घटना से अनभिज्ञ हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि दोनों पक्ष इस मामले को शांति से सुलझाएंगे और प्रयागराज की मर्यादा का ध्यान रखेंगे।

इसी बीच, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह हर राजे गौ-प्रतिष्ठा यात्रा पर निकल रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को गौमाता की रक्षा के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने अपने दलों से दूरी बनाने का संकेत देते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस और दूसरी पार्टियों से नाता तोड़ा है, और अब भाजपा से भी दूरी बना रहे हैं।

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी पार्टी को वोट नहीं देंगे। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि सनातनी समुदाय आगे आएं और अपने वोट का सही उपयोग करें।

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