
Prayagraj : उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के माघ मेले के दौरान एक विवादित बयान को लेकर ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन की तरफ से दूसरा नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में उनसे पूछा गया है कि क्या उन्हें हमेशा के लिए माघ मेला क्षेत्र में आने से प्रतिबंधित किया जाए।
मेला प्रशासन ने यह कदम उस समय उठाया है जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने जवाब में कहा कि “पालकी से चलना धार्मिक कृत्य का अभिन्न अंग है और यह आदि शंकराचार्य के काल से 2500 वर्षों से चला आ रहा है।”
उन्होंने अपने जवाब में आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शंकराचार्य की मर्यादा का उल्लंघन किया, उनके अनुयाइयों को पीटा, पुलिसकर्मियों ने पालकी को घसीट कर अपराधियों जैसी व्यवहार किया, और परेड एवं नुमाइश का प्रदर्शन कर उनका उपहास उड़ाया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि पालकी को ऐसी जगह ले जाकर खड़ा कर दिया गया कि वह नदी में गिर जाए, जो कि हत्या का प्रयास माना जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पालकी कोई बग्घी नहीं है क्योंकि उसमें पहिए नहीं थे।
मेला प्रशासन ने पहले भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनकी वैधता का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा था कि वह ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य हैं। उनके जवाब न मिलने के बाद, आज फिर से दूसरा नोटिस जारी किया गया है।
इस विवाद के कारण मेला क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मेला प्रशासन का यह कदम उनके खिलाफ क्रिया-प्रतिक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, और क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
यह मामला धार्मिक आस्था और मेला प्रशासन के अधिकारों के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है, जिसमें दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं।












