
मेदिनीपुर। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नंदीग्राम भूमि आंदोलन (2007) के दौरान घटित सामूहिक दुष्कर्म मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले की अहम गवाह इंदुबाला दास को गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार शाम नंदीग्राम-एक ब्लॉक के गोकुलनगर (गारुपारा) इलाके से बीमार वृद्धा साक्षी की गिरफ्तारी के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई की तीखी निंदा करते हुए इसे पीड़िता और साक्षियों को डराने की कोशिश करार दिया है, जबकि भाजपा ने इसे न्यायालय के आदेश का पालन बताया है।
सूत्रों के अनुसार, अदालत के निर्देश पर सीबीआई द्वारा इंदुबाला दास को पूर्व में कई बार समन भेजा गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए बार-बार अनुपस्थित रहने के चलते उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। उसी वारंट के अनुपालन में बुधवार शाम सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया।
गौरतलब है कि मार्च 2007 में नंदीग्राम भूमि आंदोलन के हिंसक दौर के दौरान एक महिला और उसकी दो नाबालिग पुत्रियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा था। यह मामला राज्य की राजनीति में लंबे समय तक गूंजता रहा।
इंदुबाला दास उस भयावह घटना की चश्मदीद और मुख्य साक्षी मानी जाती हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले के आरोपितो में से एक की मृत्यु हो चुकी है, जबकि अन्य चार फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
मामले के एक अन्य साक्षी और तृणमूल नेता स्वदेश दास ने केंद्रीय एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “18 वर्षों से आरोपीत खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन अब साक्षी को ही जेल भेजा जा रहा है।”
तृणमूल कांग्रेस के तमलुक संगठनात्मक जिला अध्यक्ष सुजीत राय ने कहा, “इंदुबाला दास हृदय रोग से पीड़ित हैं। जिस सक्रियता के साथ सीबीआई ने एक बीमार और वृद्ध साक्षी को गिरफ्तार किया है, वैसी तत्परता मुख्य आरोपितो के खिलाफ कभी नहीं दिखाई गई। भाजपा के करीबी आरोपितों को बचाने के लिए यह दमनकारी कदम उठाया गया है। पार्टी इंदुबाला दास को हर संभव कानूनी सहायता देगी।”
वहीं भाजपा नेता प्रलय पाल ने तृणमूल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा,
“यह मामला पूरी तरह न्यायालय के अधीन है। सीबीआई केवल अदालत के आदेशों का पालन कर रही है। इसमें राजनीति घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
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