पूर्व महापौर और पुलिस विवाद मामले की जांच हाईकोर्ट ने एसटीएफ को सौंपी

जबलपुर। मप्र में हेलमेट चेकिंग विवाद में पूर्व महापौर प्रभात साहू को पुलिस के क्लीन चिट देने के बाद उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठने के चलते हाईकोर्ट ने मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान लॉर्डगंज थाने के टीआई नवल आर्य और एसआई लेखराम नदोनिया व्यक्तिगत रूप से जबजपुर हाईकोर्ट में उपस्थित रहे। दोनों अधिकारियों ने अदालत के समक्ष दोनों फिर की केस डायरी प्रस्तुत की। कोर्ट ने इन दस्तावेजों के साथ-साथ मेडिकल रिपोर्ट और घटनाक्रम के विवरण का भी बारीकी से अवलोकन किया।

कोर्ट ने पाया कि जांच असंतुलित रही है और पुलिस ने एक पक्ष के मामले को प्राथमिकता देते हुए दूसरे पक्ष के साथ हुई गंभीर घटनाओं को नजर अंदाज कर दिया। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने कहा कि जिस तरह से इस मामले में अब तक जांच की गई है, वह न केवल अधूरी है बल्कि निष्पक्षता के मानकों पर भी खरी नहीं उतरती। अधिवक्ता मोहित वर्मा ने याचिका के माध्यम से पूरे मामले को कोर्ट के समक्ष रखा। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह आया कि लॉर्डगंज थाना प्रभारी के द्वारा पुलिसकर्मी के ऊपर तो गंभीर धाराएं लगाई गई परन्तु एफआईआर कायम करने से पहले ही प्रभात साहू को क्लीन चिट दे दी गई।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लॉर्डगंज थाने में दर्ज अपराध की जांच तत्काल प्रभाव से एसटीएफ, जबलपुर को स्थानांतरित की जाती है। एसटीएफ को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी तथ्यों, वीडियो फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, केस डायरी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर स्वतंत्र जांच करे और अगली सुनवाई तक अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करे, ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या प्रभाव की संभावना न रहे।

कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड में लिया कि नोटिस की विधिवत तामील और कार्यालयीन रिपोर्ट में पुष्टि होने के बावजूद पूर्व महापौर प्रभात साहू की ओर से कोई भी अधिवक्ता या प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। डिविजनल बेंच ने इसे सामान्य अनुपस्थिति मानने से इनकार करते हुए संकेत दिया कि ऐसे संवेदनशील मामले में गैरहाजिरी कई सवाल खड़े करती है। अनुपस्थिति को लेकर कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की सुनवाई में इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

पूरा मामला 18 सितंबर 2025 का है, जब जबलपुर शहर में ट्रैफिक पुलिस द्वारा नियमित हेलमेट चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान भाजपा के पूर्व महापौर प्रभात साहू को बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाते हुए रोका गया। याचिका में आरोप है कि नियमों का पालन करने के बजाय पूर्व महापौर ने अपनी राजनीतिक पहचान का हवाला देते हुए ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी से बहस शुरु कर दी। देखते ही देखते मामला अभद्रता में बदल गया। पूर्व महापौर ने अपने समर्थकों को मौके पर बुला लिया। कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्र हो गए, जिससे सड़क पर अव्यवस्था फैल गई और ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। भीड़ द्वारा पुलिस कर्मियों के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

अब इस पूरे मामले की सुनवाई 17 फरवरी 2026 को होगी। तब तक एसटीएफ अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में कोर्ट में पेश करेगी।

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