ज्ञानवापी मामला : वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को न्यायालय ने दो हजार रूपये जुर्माना लगाया

ज्ञानवापी मामला : उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मामले में 1991 में दायर मूल वाद के एक मुकदमे में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को जुर्माना लगाया है।

सिविल जज (सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट )भावना भारती की अदालत ने मंगलवार शाम सुनवाई के बाद वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी पर दो हजार रूपये जुर्माना लगाया। अब इस मामले में 22 जनवरी को सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई पर वादमित्र ने आपत्ति दाखिल करने के साथ समय मांगा था। वादी तीन बहनों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए वादमित्र पर जुर्माना लगाने की मांग की थी। न्यायालय के जुर्माना लगाने के बाद वादमित्र ने भी फिर आपत्ति दाखिल की है।

बताते चले ज्ञानवापी मामले में, वादी अब स्वर्गीय हरिहर पांडेय की तीन बेटियों (मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा, और रेनू पांडेय)ने मुकदमे में पक्षकार बनाये जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। ज्ञानवापी में नए मंदिर निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने को लेकर वर्ष 1991 से लंबित मुकदमे में पक्षकार बनाने के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र पर प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने भी आपत्ति की है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) भावना भारतीय की अदालत में सुनवाई चल रही है।

इस मुकदमे में खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता तौहिद खान ने भी पिछली सुनवाई में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। जिसमें ज्ञानवापी से जुड़े सभी मामलों में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसमें 17 जनवरी को वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अपना पक्ष रखना था। लेकिन शहर से दूर रहने के कारण वादमित्र अपना पक्ष नही रख पाए थे। उन्होंने इसके लिए स्थगन प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसमें वादमित्र को हटाने के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र की आवेदनकर्ता स्व.हरिहर पांडेय की बेटियों ने विरोध किया था। इस पर वादमित्र ने भी आपत्ति दाखिल की है।

उधर,मुकदमे के प्रतिवादी पक्ष अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के वकील रईस अहमद व एखलाक अहमद ने भी स्व.हरिहर पांडेय की तीन बेटियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा और रेणू पांडेय प्रार्थना पत्र पर आपत्ति जताते हुए दलील दी थी कि पक्षकार बनाने की इनके प्रार्थना पत्र पहले भी खारिज हो चुके हैं। वाद में जिन लोगों ने प्रार्थना पत्र दिया है सभी पार्टी हैं और न ही आवश्यक हैं। तीनों बहनों को मुकदमे में पक्षकार बना दिया गया तो हिन्दू-मुस्लिम समुदाय से प्रार्थना पत्र दाखिल करने वालों की तांता लग जाएगी। ऐसे में न तो मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ सकेगी और न ही निस्तारण हो सकेगा।

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