Sitapur : जिला मुख्यालय पर गूंजा मजदूरों का दर्द, डीएम ने मिल मालिकों को तलब करने का दिया भरोसा

  • दारूका पेपर मिल के झगड़े में सड़क पर आए मजदूर, भाइयों की रार ने छीना निवाला
  • 25 साल की सेवा के बाद दाने-दाने को मोहताज हुए कर्मचारी, हिंदू शेर सेना ने भरी हुंकार

Sitapur : जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर दूर स्थित दारूका पेपर मिल के सैकड़ों कर्मचारियों का सब्र अब जवाब दे गया है। पिछले चार महीनों से मिल के गेट पर ताला लटका है, लेकिन मजदूरों की उम्मीदें अब भी हर रोज उन्हें हाजिरी लगाने के लिए मिल तक खींच लाती हैं। विडंबना देखिए कि हाजिरी तो लग रही है, लेकिन जेब खाली है। विकास हिंदू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पहुंचे इन कर्मचारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया और अपनी पीड़ा सुनाते हुए कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से इस मिल को अपने खून-पसीने से सींच रहे हैं, मगर आज उन्हें बेसहारा छोड़ दिया गया है। मिल मालिकों के बीच चल रही पार्टनरशिप की जंग ने इन बेकसूर मजदूरों के घरों का चूल्हा बुझा दिया है।

असल में, दारूका पेपर मिल की इस तालाबंदी के पीछे भाइयों के आपसी बंटवारे की कड़वाहट छिपी है। मालिकान आपस में इस कदर उलझे हैं कि एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं, लेकिन उनकी इस रार में पिस वह गरीब कर्मचारी रहा है जिसके पास इस नौकरी के अलावा गुजर-बसर का कोई दूसरा साधन नहीं है। विकास हिंदू ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि अगर कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ और उन्हें उनका बकाया वेतन नहीं मिला, तो राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। मजदूरों का सवाल सीधा हैकृमालिकों के झगड़े की सजा उन्हें क्यों दी जा रही है?

डीएम ने लिया संज्ञान, अब मालिकों की बारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि इस विवाद का जल्द समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही मिल मालिकों को नोटिस भेजकर बुलाया जाएगा और उनसे पूरी स्थिति की जानकारी ली जाएगी। प्रशासन का दावा है कि वह कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। फिलहाल, कर्मचारी टकटकी लगाए डीएम के आदेश की ओर देख रहे हैं, क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि जीवन-मरण का सवाल बन चुका है। अब देखना यह होगा कि आपसी रंजिश में अंधे हो चुके मिल मालिक इन मजदूरों के हक के लिए पसीजते हैं या यह विवाद और तूल पकड़ेगा।

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