
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में आगे की किसी भी कार्यवाही पर लगी रोक को दो फरवरी तक बढ़ा दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का समय दिया और अगली सुनवाई की तिथि भी तय की।
याची शिक्षकों की अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह परिहार ने बताया कि कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 मामले में कोई कार्यवाही नहीं करेंगे। इस अंतरिम आदेश की राहत उन याचियों को भी मिलेगी जो इस याचिका से संबंधित अन्य याचिकाओं में शामिल हैं।
न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 प्राथमिक शिक्षकों की याचिका पर दिया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण के शासनादेश को चुनौती दी गई थी।
याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एच. जी. एस. परिहार ने बताया कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1972 के नियमों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि नियम 21 के तहत शिक्षक की सहमति के बिना समायोजन नहीं किया जाना चाहिए।
याचियों का यह भी तर्क है कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात जैसी विसंगतियां पैदा हो रही हैं। राज्य सरकार की ओर से भी अधिवक्ता पेश हुए। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक याचियों को मिली अंतरिम राहत को जारी रखते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।










