
Swami Avimukteshwaranand : प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर हुई घटना को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखी। उन्होंने इस पूरे विवाद पर तीखे शब्दों में कहा कि साधु-संतों को गंगा में स्नान के लिए परमिशन लेने की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई बच्चा अपनी मां गंगा से मिलने के लिए अनुमति मांगता है?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अधिकांश लोग इस घटना को समझ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि मेला प्रशासन और सरकार के अधीन संत और साधु इतनी दुर्व्यवहार क्यों झेल रहे हैं? उन्होंने कहा कि वह अपने शिविर से संगम तट तक गए थे, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग की, जिसे उन्होंने ही तोड़ा था। पुलिस ने कहा था कि उन्हें स्नान कराने के लिए लगाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनके साथ सहयोग कर रही थी और बैरिकेड खुलवाने में मदद की।
उन्होंने कहा, “अगर हमारे लोग कोई उद्दंडता कर रहे थे तो क्यों किसी ने पहले नहीं बताया? हमने नियम का पालन किया है और आगे भी करेंगे।”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “क्या किसी साधु-संत को गंगा में स्नान के लिए परमिशन चाहिए? इसमें परमिशन की बात क्यों हो? कोई बच्चा अपनी मां से मिलने के लिए परमिशन मांगता है? हम अपने धार्मिक कर्मकांड करते हैं, और लाखों-करोड़ों लोग हमारी झलक देखने आते हैं। हम अपने कार्यक्रम की सूचना पहले ही दे चुके हैं।”
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य हमेशा पालकी में ही स्नान करते आए हैं और यह परंपरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब पट बंद होते हैं, तब भी पालकी नीचे आती है। वे इस परंपरा का पालन कर रहे हैं और इससे किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
शंकराचार्य ने कहा कि यह सवाल ही नहीं उठता कि उन्हें अनुमति चाहिए। वे कहते हैं, “हमारे परंपरागत तरीके से ही स्नान करते आए हैं। पिछले दो माघ मेले से हम पालकी में ही जाते रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन भगदड़ और हिंसा को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि कल की घटना में पालकी से उतरकर उनके अनुयायियों को धक्का-मुक्की कर भगदड़ मचाई गई। उनके एक परम मित्र की खून लगी चादर दिखाते हुए उन्होंने कहा कि हमला किया गया और उनके अनुयायियों को मारा-पीटा गया।
उन्होंने कहा, “मेला प्रशासन चाहता है कि हमारा आयोजन रुक जाए। हमारे साथ हुए अत्याचारों को मैं कभी नहीं भूल सकता।”
शंकराचार्य ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर और मंडलायुक्त की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि ये अधिकारी न सिर्फ हठधर्मी हैं, बल्कि दुष्ट भी हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके रथ को बीच सड़क पर रोका, उनके अनुयायियों को मारा-पीटा और उन्हें परेशान किया।
उन्होंने कहा कि डीएम ने गलत बातें कही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने झूठ बोला है, और उनके साथ हुए अत्याचार की रिपोर्ट नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह खुद को शंकराचार्य मानते हैं और यह देश का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति तय नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “मुझे द्वारका पीठ, श्रृंगेरी मठ और गोवर्धन पीठ की स्वीकृति मिली है।”
आंदोलन जारी रहने का संकेत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे माघी पूर्णिमा तक पालकी पर ही रहेंगे और जब तक प्रशासन अपनी भूल सुधार नहीं करता, उनका विरोध जारी रहेगा।
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