कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान देने वाले मंत्री पर भड़का SC, MP सरकार को उचित कदम उठाने के निर्देश

नई दिल्ली। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मध्य प्रदेश सरकार के रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी (विशेष जांच दल) ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।

सुप्रीम कोर्ट को एसआईटी ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद उसने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए रिपोर्ट सरकार को भेजी थी, जो फिलहाल लंबित है। यह मामला ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान से जुड़ा है, जिस पर विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। विजय शाह ने इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

कोर्ट ने हैरानी जताई कि अगस्त 2025 से अब तक मध्य प्रदेश सरकार एसआईटी के आवेदन पर कोई फैसला नहीं ले सकी है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा,
“आप 19 अगस्त 2025 से एसआईटी की रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं और अब 19 जनवरी हो चुकी है।”

सीजेआई ने बताया कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सील कवर में कोर्ट में दाखिल की थी, जिसे बाद में ओपन कोर्ट में खोला गया। रिपोर्ट में विभिन्न पहलुओं की जांच की गई है, हालांकि याचिकाकर्ता के पुराने मामलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

विजय शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदन सिंह ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है और जांच में सहयोग कर रहे हैं। इस पर सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,
“कहां है आपका माफीनामा? रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है और अब बहुत देर हो चुकी है।”

कोर्ट ने पहले ही विजय शाह की सार्वजनिक माफी को कानूनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास बताते हुए खारिज कर दिया था और उनकी ऑनलाइन माफी पर भी असंतोष जताया था। अदालत ने इसे सिर्फ “मगरमच्छ के आंसू” करार दिया था।

सुनवाई के दौरान खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती भी अदालत में मौजूद थे। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि अन्य याचिकाओं में उठाए गए पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कानून के तहत उचित कदम उठाते हुए विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी पर जल्द फैसला लेने का स्पष्ट निर्देश दिया।

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