
उन्नाव : उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में हुई मौत से जुड़े कस्टोडियल डेथ मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सेंगर की जमानत और सजा निलंबन की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह प्रकरण अत्यंत गंभीर है और इसमें सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सिद्ध हो चुके हैं। अदालत ने यह भी माना कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित करने का कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2018 का है, जब उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता को अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। हिरासत के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और प्रताड़ना के चलते की गई सुनियोजित कस्टोडियल डेथ थी।
परिजनों का आरोप था कि तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के प्रभाव में पीड़िता के पिता को जेल में प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उनकी जान चली गई। इस घटना ने उस समय देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भारी आक्रोश पैदा किया था।
CBI जांच और निचली अदालत का फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। CBI ने विस्तृत जांच के बाद कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने सेंगर को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।
इसके बाद सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में सजा निलंबन और जमानत की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी, जिसे अब अदालत ने खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और कानून के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। अदालत ने कहा कि प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा कानून का दुरुपयोग करना लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसे मामलों में कठोर दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
न्यायिक संदेश और सामाजिक प्रभाव
हाईकोर्ट के इस फैसले को पीड़िता के परिवार और न्याय की मांग कर रहे लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय एक मजबूत संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो जवाबदेही से बच नहीं सकता।
महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर असर
उन्नाव दुष्कर्म कांड और उससे जुड़े मामलों ने देश में महिलाओं की सुरक्षा, सत्ता के दुरुपयोग और न्यायिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। दिल्ली हाईकोर्ट का यह ताजा आदेश इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो यह संकेत देता है कि न्यायिक प्रक्रिया में पीड़ितों के अधिकार और न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।










