भारत ने पोलैंड के पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर जताया एतराज

नई दिल्ली। भारत ने पाेलैंड के साथ आपसी व्यापार तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने की इच्छा का इज़हार किया लेकिन इसके साथ ही उसे रूस के साथ व्यापार के मुद्दे पर अमेरिका द्वारा टैरिफ के जरिये अनुचित रूप से निशाना बनाये जाने तथा पोलैंड द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद से आतंकवादी ढांचे को मजबूती मिलने पर अपना एतराज खुल कर ज़ाहिर किया।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को यहां हैदराबाद हाउस में पोलैंड गणराज्य के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय बैठक में खुल कर भारत का पक्ष रखा जिस पर मेहमान नेता ने अपनी सहमति जताते हुए माना कि भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाया जाना अनुचित है। उन्होंने कहा कि पोलैंड भी आतंकवादी हिंसा का शिकार बना है इसलिए वह आतंकवाद को मजबूती देने की बात का समर्थन नहीं कर सकता।

राडोस्लाव सिकोरस्की और ऐनी एप्पलबॉम 17-19 जनवरी तक भारत की यात्रा पर आये हैं। उन्होंने 17 एवं 18 जनवरी को जयपुर साहित्य उत्सव में शिरकत की थी। कल रात नई दिल्ली पहुंचे थे। आज की बैठक के बाद उनका रात में स्वदेश रवाना होने का कार्यक्रम है।

डॉ. एस जयशंकर ने बैठक में अपने आरंभिक वक्तव्य में पाेलैंड के उप प्रधानमंत्री और आपके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा, “हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया में काफी उथल-पुथल मची हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित दो देशों के तौर पर, जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं, विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना ज़ाहिर तौर पर उपयोगी है। हमारे द्विपक्षीय संबंध भी लगातार आगे बढ़े हैं, लेकिन फिर भी, उन्हें लगातार ध्यान देने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड के पारंपरिक रूप से गर्मजोशी भरे और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में, यह उच्चस्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान और जीवंत आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों से चिह्नित हुआ है। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा से हमारे संबंधों को रणनीतिक साझीदारी का दर्जा मिला।

आज, हम एक्शन प्लान 2024-28 की समीक्षा करेंगे, जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझीदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। हम व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और डिजिटल नवाचार में अपने सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।

विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार 7 अरब डॉलर है, जिसने पिछले दशक में लगभग 200% की वृद्धि दर्ज की है। पोलैंड में भारतीय निवेश 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है, जिससे पोलैंड के लोगों के लिए कई रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं। भारत की मज़बूत आर्थिक वृद्धि, उसके बाज़ार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ, पोलिश व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा, “हम गहरे सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने पर भी विचार करेंगे। ‘डोब्री महाराज’ एक प्रिय कड़ी बनी हुई है। मुझे पिछले साल फरवरी में पहले जामसाहेब मेमोरियल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत पोलिश युवाओं से मिलने की याद है। यह देखकर खुशी होती है कि इंडोलॉजी फल-फूल रही है और पोलैंड में योग लोकप्रिय है।”

डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज, हमारी बातचीत में स्वाभाविक रूप से क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम शामिल होंगे। विशेष रूप से, हमारे संबंधित पड़ोस पर आकलन का आदान-प्रदान उपयोगी होगा। आप अपनी यात्रा के दौरान भी इस बारे में सार्वजनिक रूप से बात कर रहे हैं।

हाल के दिनों में, पिछले सितंबर में न्यूयॉर्क में और इस जनवरी में पेरिस में, हमने यूक्रेन संघर्ष और इसके प्रभावों पर अपने विचार खुलकर साझा किए हैं। ऐसा करते हुए, हमने बार-बार इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाना अनुचित और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा, “मैं बार-बार रेखांकित कर चुका हूँ कि भारत को चुनिंदा तौर पर निशाना बनाना न केवल अनुचित है बल्कि पूरी तरह बेबुनियाद भी है। आज मैं इसे फिर दोहराता हूँ।”

विदेश मंत्री ने कहा, “उप प्रधानमंत्री जी, आप हमारे क्षेत्र से अनजान नहीं हैं और निश्चित रूप से सीमा पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से परिचित हैं। मुझे उम्मीद है कि इस बैठक में हम क्षेत्र की आपकी हाल की कुछ यात्राओं पर चर्चा करेंगे। पोलैंड को आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस दिखाना चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को बढ़ावा देने में मदद नहीं करनी चाहिए।”

पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने अपने वक्तव्य में भारत की चिंताओं को स्वीकार किया। उन्होंने जयपुर साहित्य उत्सव को एक ‘शानदार वैश्विक सांस्कृतिक कार्यक्रम’ बताते हुए इसमें शामिल होने पर खुशी का इज़हार किया और कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से पहले भी निजी और आधिकारिक तौर पर कई बार भारत आ चुके हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझीदारी स्थापित करने के बाद यह उनकी पहली यात्रा है। उन्होंने कहा, “हम प्रगति और भविष्य के नजरिए की समीक्षा करना चाहते हैं। हम अपने-अपने क्षेत्रों में बहुत गतिशील देश हैं और इसलिए हमें मौजूदा अवसरों का पता लगाना चाहिए। हम ऐसे देश भी हैं जो 19वीं सदी में उपनिवेश थे, इसलिए उस क्षेत्र में हमारी खास संवेदनशीलताएं हैं।”

राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा, “मैं सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने की ज़रूरत पर आपसे पूरी तरह सहमत हूँ। जैसा कि आपने सुना होगा, पोलैंड हाल ही में आगजनी और राज्य प्रायोजित आतंकवाद के प्रयास का शिकार हुआ है, जब एक चलती ट्रेन के नीचे पोलिश रेलवे लाइन को उड़ा दिया गया था। सौभाग्य से, आतंकवादियों की नाकामी के कारण कोई हताहत नहीं हुआ। मैं टैरिफ के ज़रिए चुनींदा रूप से निशाना बनाने की नाइंसाफी पर भी आपसे पूरी तरह सहमत हूँ। यूरोप में, हम भी इसके बारे में काफी कुछ जानते हैं और हमें लगता है कि इससे वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल हो रही है… हमें उम्मीद है कि भारत यूरोप में जुड़ा रहेगा। हमने देखा है कि आप यूरोप में हर जगह दूतावास स्थापित कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि आप यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को लेकर गंभीर हैं।”

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