
New Delhi : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के सिंगुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य में राजनीतिक परिवर्तन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा और एनडीए ने जंगलराज को रोका और अब पश्चिम बंगाल भी तृणमूल कांग्रेस के महा जंगलराज को विदा करने के लिए तैयार है।
यहां एक राजनीतिक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विकास, सुशासन और सुरक्षा को लेकर मतदाताओं से भाजपा के पक्ष में समर्थन मांगा। उन्होंने एक बार फिर सुरक्षा और घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार घुसपैठियों को संरक्षण देती है और फर्जी दस्तावेज बनाए जाते हैं। अब समय आ गया है कि घुसपैठ रोकी जाए और अवैध रूप से बसे लोगों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जाए। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि उनका एक-एक वोट इस बदलाव को संभव बना सकता है।
उन्होंने शिक्षा, महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी तृणमूल पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था माफिया और भ्रष्टाचार के कब्जे में है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने राज्य के लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि इससे हिंसा, अपराध और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। उन्होंने सिंडिकेट टैक्स और माफियावाद खत्म करने की भी बात कही।
सभा में प्रधानमंत्री ने मछुआरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में लाखों परिवार मछली व्यवसाय से जुड़े हैं और निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए मछुआरों को सहायता और बेहतर तकनीक की जरूरत है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने देशभर के मछुआरों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है, जिस पर राज्य सरकारों को पंजीकरण कराना है लेकिन बंगाल में इस प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार सहयोग नहीं कर रही, जिससे मछुआरों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भाजपा नेता ने कहा कि बंगाल में भाजपा की डबल इंजन सरकार जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि जहां-जहां ऐसी सरकारें हैं, वहां केंद्र की योजनाओं के तहत बेहतर काम हुआ है। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले वहां की सरकार आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं कर रही थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद गरीबों को मुफ्त इलाज मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता भी तृणमूल सरकार को सबक सिखाने का मन बना चुकी है।
प्रधानमंत्री ने बांग्ला भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा की चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के प्रयासों से बांग्ला भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा और दुर्गा पूजा को यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में स्थान मिला। उन्होंने कहा कि उनका निरंतर प्रयास बंगाल के नौजवानों, किसानों और माताओं-बहनों की सेवा करना है लेकिन राज्य की तृणमूल सरकार केंद्र की योजनाओं को ठीक से लागू नहीं होने देती।
उन्होंने कहा कि वह ऐसे समय सिंगुर आए हैं, जब देश वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। संसद में इस अवसर पर विशेष चर्चा हुई और पूरे देश ने ऋषि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया। उन्होंने कहा कि हुगली और वंदे मातरम् का रिश्ता विशेष है और माना जाता है कि यहीं इस गीत को उसका पूर्ण स्वरूप मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह वंदे मातरम् आजादी का उद्घोष बना, उसी तरह इसे पश्चिम बंगाल और भारत को विकसित बनाने का मंत्र बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर इंडिया गेट के सामने नेताजी की प्रतिमा स्थापित की गई, लालकिला से आजाद हिंद फौज के योगदान को पहली बार नमन किया गया और अंडमान-निकोबार में द्वीपों का नामकरण नेताजी के नाम पर किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों की परंपरा में बदलाव करते हुए 23 जनवरी नेताजी की जन्म जयंती से कार्यक्रमों की शुरुआत और 30 जनवरी, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर समापन का निर्णय लिया गया।
उल्लेखनीय है कि सिंगुर की यह जनसभा पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हुई। सिंगुर वही स्थान है जहां से टाटा की फैक्ट्री के खिलाफ शुरू किए आंदोलन से राज्य में वामदलों की सरकार का शासन खत्म कर तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई थी।















