
- आइसा, दलित व दूसरे छात्र संगठनों ने निकाला मार्च, विश्वविद्यालय प्रशासन ने धारा-144 का हवाला कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी
लखनऊ : लखनऊ यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला की 10वीं बरसी 17 जनवरी 2026 के अवसर पर आयोजित पैदल मार्च के दौरान छात्रों और प्रशासन के बीच टकराव व तनाव की स्थिति बन गई।
छात्र संगठनों मुख्यत: आइसा AISA और अन्य वामपंथी/दलित संगठनों ने रोहित वेमुला की याद में एक संवाद कार्यक्रम और मार्च निकालने की योजना बनाई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में धारा-144 और शांति व्यवस्था का हवाला देते हुए इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी।
अनुमति न मिलने के बावजूद छात्र मार्च निकालने पर अड़ गए। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर उनकी आवाज दबा रहा है।
अनुमति न मिलने के बावजूद छात्रों ने जैसे ही गेट नंबर-5 से अंबेडकर प्रतिमा की ओर मार्च शुरू किया, प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान छात्रों के दूसरे गुट एवीबीपी समर्थित बताए जा रहे) वहां पहुंचने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों गुटों में तीखी बहस हुई जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। इस दौरान कुछ संगठनों के बैनर और पोस्टर भी फाड़े गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और भारी पुलिस बल (PAC) को मौके पर तैनात किया गया। पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों गुटों को अलग किया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति भंग करने और बिना अनुमति कार्यक्रम आयोजित करने के आरोप में कुछ छात्र नेताओं को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। परिसर में फिलहाल तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
बता दें हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र रोहित चक्रवर्ती वेमुला की आत्महत्या को आज दस साल हो गए हैं। 26 वर्षीय दलित छात्र रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को यूनिवर्सिटी के होस्टल के एक कमरे में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। उनकी आत्महत्या का मामला लंबे वक़्त तक सुर्खियों में रहा और आज भी इस बारे में बात होती है। रोहित यूनिवर्सिटी में आंबेडकर स्टूडेंट्स असोसिएशन के सदस्य थे। वो कैंपस में दलित छात्रों के अधिकार और न्याय के लिए भी लड़ते रहे थे।










