
Lucknow : पावर कॉरपोरेशन की तरफ से अपनी चुप्पी पर विराम लगाते हुए सूबे के बिजली यूनियनों के नेताओं को लेकर बड़ा आरोप लगाया गया है। पावर कॉरपोरेशन को मजबूर होकर सफाई देनी पड़ी कि वर्टिकल व्यवस्था के बारे में कुछ कथित संगठन के नेताओं द्वारा अपने हितों की पूर्ति के लिए ग़लत तथ्य देकर झूठी अफ़वाह एवं भ्रम फैलाए जा रहे हैं। प्रबंधन का आरोप है कि ऐसे लोग अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का भी ठीक से निर्वहन नहीं करते हैं। न खुद काम करते हैं और न ही दूसरों को काम करने देते हैं।
वर्टिकल व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं में है भ्रम की स्थिति
एक ओर, जोर-शोर से दावा किया जाता है कि वर्टिकल व्यवस्था लागू करने के कारण उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और विभागीय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। दूसरी ओर, बिजली यूनियनों के नेताओं का आरोप है कि इससे न तो बिजली व्यवस्था सुधरेगी और न ही उपभोक्ताओं को कोई फायदा होगा। चूंकि आम उपभोक्ताओं की पहुंच शक्ति भवन में नहीं बल्कि बिजली यूनियनों तक होती है। इसलिए उन्हें यूनियन के नेताओं के आरोपों पर जल्दी विश्वास हो जाता है।
यूपीपीसीएल निदेशक ने उपभोक्ताओं को दिलाया विश्वास
वर्टिकल व्यवस्था के ऊपर उठ रहे सवालों को लेकर पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वितरण) जी. डी. द्विवेदी ने सफाई देते हुए कहा कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में लागू की गई वर्टिकल सिस्टम से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था तथा उपभोक्ता सेवा में अत्यधिक सुधार हुआ है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ही ट्रिपिंग समाप्त कर विद्युत दोषों को कम करना, ट्रांसफार्मर डैमेज को न्यूनतम करके उच्च गुणवत्ता युक्त विद्युत आपूर्ति मुहैया कराना, उपभोक्ता सेवा में सुधार तथा सुचिता एवं पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
- 1912 पर उपभोक्ताओं की शिकायतों का किया जा रहा निस्तारण
प्रबंधन की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस व्यवस्था में 1912 पर उपभोक्ताओं की सभी सूचनाएं दर्ज की जाती हैं और वर्टिकल व्यवस्था के बाद लखनऊ में 26,797 शिकायतें प्राप्त हुईं हैं जिनमें से 26, 785 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है जोकि लगभग 100 प्रतिशत है। 1912 की प्रतिदिन मॉनिटरिंग होती है और मुख्य अभियन्ता से लेकर नीचे तक के कार्मिक दर्ज शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करते हैं।












