
पणजी : गोवा के अरपोरा गांव में हुए भीषण नाइटक्लब अग्निकांड को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इस हादसे में 25 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि विवादित नाइटक्लब वर्ष 1999 से अब तक अलग-अलग नामों से संचालित होता रहा है और सरकार इसके खिलाफ अब व्यापक और गहन जांच कराने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हादसे का शिकार हुआ नाइटक्लब ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ केवल हालिया नाम है। इससे पहले भी यह प्रतिष्ठान कई बार नाम बदलकर चलाया जाता रहा, जिससे नियमों और लाइसेंस से जुड़े प्रावधानों को दरकिनार किया गया। सरकार अब वर्ष 1999 से लेकर अब तक क्लब के संचालन से जुड़े सभी दस्तावेजों, अनुमतियों और नियमों के उल्लंघन की विस्तृत जांच कराएगी।
किरायेदारी की जमीन पर मिली थी शुरुआती अनुमति
विधानसभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि जिस जमीन पर यह नाइटक्लब बना है, वह किरायेदारी की थी। इसी आधार पर वर्ष 1999 में इसे संचालन की अनुमति दी गई थी। इसके बाद समय-समय पर क्लब का नाम बदला गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि हर बार सभी जरूरी कानूनी अनुमतियां और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया या नहीं।
अग्निकांड के बाद प्रशासन अलर्ट
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस हादसे के बाद राज्य सरकार किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। अग्नि सुरक्षा, भवन अनुमति, पर्यावरण स्वीकृति और आबकारी नियमों समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने उठाए थे गंभीर सवाल
विधानसभा में विपक्ष ने सवाल उठाया था कि आखिर कैसे इतने सालों तक यह नाइटक्लब बिना पर्याप्त निगरानी के चलता रहा और क्या प्रशासनिक स्तर पर भी लापरवाही हुई। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
भविष्य में सख्ती के संकेत
प्रमोद सावंत ने यह भी संकेत दिए कि इस घटना के बाद राज्य में नाइटक्लब, बार और भीड़भाड़ वाले मनोरंजन स्थलों के लिए नियम और सख्त किए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो।
गौरतलब है कि अरपोरा नाइटक्लब अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब सरकार की इस कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।















